Real Story Of Ghost In Hindi Language

Real Story Of Ghost In Hindi Language


Real Story Of Ghost In Hindi Language
Bhoot Story

Hello,

Today we are writing Real Story Of Ghost In Hindi Language. This Bhoot Story can assist you in your life. 

This Real Story Of Ghost In Hindi Language is for everyone who loves to read Bhoot Story.

Have Fun!


नमस्कार,

आज हम रियल स्टोरी ऑफ़ घोस्ट इन हिंदी लिख रहे हैं। ये भूत स्टोरी आपको अपने जीवन में मदद करेगी। 

ये रियल स्टोरी ऑफ़ घोस्ट इन हिंदी सभी के लिए हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक बच्चे, या बड़े, या माता-पिता या शिक्षक हैं। जिनको भी भूत स्टोरी पढ़नी अच्छी लगती है वो सब इसे पढ़ सकती है।

मज़े करो!


Ghost Servent  - भूतिया नौकर 


Real Story Of Ghost In Hindi Language
 Real Story Of Ghost In Hindi Language

बहुत समय पहले की बात है कि एक गांव में एक लालची सेठ अपनी बीवी के साथ रहता था। उसके घर पर एक नौकर काम करता था। सेठ और उसकी बीवी उससे दिनभर काम करवाते थे। फिर जब वो नौकर दिनभर का काम कर के अपने कमरे में सोने के लिए जाता तब भी सेठ की पत्नी उसे किसी ना किसी के बहाने से उसे बुला लेती। 


सेठानी:-  रामू, कहाँ रह गया। जल्दी आ। हर वक़्त आराम की ही पड़ी रहती है। 

रामू:- आया मालकिन, बस अभी आया। 

सेठानी:- तुझे सुनाई नहीं दिया, मैं तुझे कब से पुकार रही हूँ। क्या मैं तुझे पागल लगती हूँ। 

रामू:- अरे नहीं नहीं मालकिन। आपने एक बार ही तो बुलाया था और मैं झट-से चला आया। 

सेठानी:- अरे रामू, अभी के अभी जा। शहर में जो श्यामलाल दर्ज़ी है, उससे मेरा सूट ले कर आ। कल मैंने सीताराम की बेटी की शादी में पहनना है। 

रामु:- लेकिन मालकिन, अभी तो शाम हो गयी है। अगर मैं इस समय शहर गया तो वापसी लौटते-लौटते आधी रात हो जाएगी और आधी रात को जंगल के रास्ते वापिस आना खतरे से खाली नहीं होगा। अगर आप कहे तो मैं कल सुबह चला जाऊ ?

सेठानी:- अगर तुम कल सुबह गए, तो कल शाम तक लौटोगे और तब तक तो सीताराम की बेटी की शादी भी खत्म हो जाएगी और मैं पहनूंगी क्या ? तुम अभी के अभी जाओ। 

रामू:- अरे मालकिन, थोड़ी सी तो दया करो। मैंने सुना है उस जंगल में भूत-प्रेतों का डेरा है। अगर कोई भूत मेरे सामने गया तो मेरा क्या होगा। मुझ पर थोड़ी-सी तो दया करो। 

सेठानी:- लगता है तुझे मेरी बात समझ नहीं आयी। अभी के अभी जाता है या इन्हे बुलाऊ ? वो तेरी अभी के अभी छुट्टी कर देंगे। 

रामू:- अरे नहीं मालकिन, ऐसा नहीं करे। अगर आपने मुझे नौकरी से निकाल दिया तो मैं कहाँ जाऊंगा। आप मालिक को मत बुलाओ। मैं अभी जाता हूँ सूट लेने। 


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फिर वो बेचारा रामु डरते-डरते जंगल के रास्ते शहर में दर्ज़ी से सूट लेने जाता है। लेकिन मन ही मन वो डरता है और प्रार्थना करता है।

रामु:- हे ऊपर-वाले, अभी तो रात नहीं हुई है। मैं किसी तरह शहर तो पहुँच जाऊँगा। लेकिन वापिस आते वक़्त मेरी रक्षा करना। 


रात होने तक रामू शहर तो पहुँच जाता है और वहाँ से सूट ले कर गांव वापिस जाने की तैयारी करता है। लेकिन मन ही मन वो डरता है और प्रार्थना करता है।  

रामू:- हे, ऊपर-वाले अब तो रात के 12 बज गए है। अब क्या करू ? अगर सुबह होने से पहले घर नहीं पहुँचा तो मालिक नौकरी से निकल देंगे। हे ऊपर-वाले मेरी रक्षा करना। 


ये कहते हुए वो जंगल में घुस जाता है और थोड़ी दूर चलने पर ही उसे अजीब-अजीब सी आहट सुनाई देती है और वो सोचता है:-

रामू:- अरे, मर गए रे। ये घुंगरू की आवाज़ किसकी है


वो इधर-उधर देखता है लेकिन वहाँ कोई नहीं होता। वो सोचता है:- 

रामू:- मुझे लगता है आज मैं बहुत बड़ी मुसीबत में फस गया हूँ। मैं तो जंगल के बीचो-बीच गया हूँ और अगर वापिस लोटा तो भी मरूंगा और अपने घर की तरफ गया तो भी मरूंगा। हे ऊपर-वाले मैं क्या करू ? एक काम करता हूँ, अपने घर की ओर ही चलता हूँ। 

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इतना सोच के रामु अपने घर की ओर चल देता है और थोड़े दूर चलने पर उसका पीछा एक चुड़ैल करने लगती है। रामू पलट कर देखता है तो वो हैरान रह जाता है। ये सब देख उसके मुँह से निकल पड़ता है:-


रामु:- हे भगवान, ये तो चुड़ैल है। अरे मर गए रे। अरे भागो रे भागो। 


वो वहाँ से भाग ही रहा होता है कि चुड़ैल उसके शरीर के अंदर घुस जाती है। फिर वो चुड़ैल देखते ही देखते रामू पर अपना पूरा कब्ज़ा कर लेती है। फिर रामू सीधा अपने घर की और चल देता है। 

वो सीधा अपने कमरे में जाता है और लेट जाता है और फिर सुबह होने पर सेठानी रामू को आवाज़ देती है 


सेठानी:- रामू, रामू। आवाज़ नहीं जा रही क्या तुझ तक। घोड़े बेच कर सोया है क्या ? रामू, रामू। 

रामू:- अरे, कौन है ये कमब्खत। जिसने मेरी नींद खराब कर दी। 

सेठानी:- रामू,  रामू। कहाँ मर गया। मेरे सूट का क्या हुआ जो लाने के लिए मैंने तुझे कल भेजा था। 

रामू:-  पागल औरत, क्यों चिल्ला रही है ? क्या हुआ

सेठानी:- अरे, इसकी हिम्मत तो देखो। मुझे पागल बोल रहा है। अरे मैंने तुझे शहर से सूट लेने भेजा था। मेरा सूट किधर है ?

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रामू:- अरे, मुझे नौकर समझ रखा है क्या ? जो मैं तेरे कपडे ला कर दू। खुद जा और ले आ। 

सेठानी:- अरे, इसकी हिम्मत तो देखो। मुझे इस तरह से कह रहा है। अभी रुक मैं तुझे बताती हूँ। मैं इन्हे बुला कर लाती हूँ। 


फिर सेठानी जल्दी से अपने पति के पास जाती है और उन्हें पूरी बात बताती है। 

सेठ:- अच्छा, उसकी इतनी हिम्मत। उसने तुम्हे बेवकूफ कहा। तुम चलो मेरे साथ। मैं अभी उसे सीधा करता हूँ। 


फिर वो दोनों रामू के पास जाते है। 

सेठ:-  रामू, तेरी इतनी हिम्मत। तू अपनी ही मालकिन से बत्तमीज़ी करेगा। 

रामू:- तुम दोनों अभी के अभी यहाँ से निकल जाओ। मेरा दिमाग मत खराब करो। नहीं तो तुम दोनों को यहाँ से उठा के बाहर फेक दूंगा। 

सेठ:- अरे, मर गए रे। इसमें इतनी हिम्मत कहाँ से गयी। अरे सेठानी देखो तो इसकी आँखे कैसी लाल हो रखी है 

सेठानी:- अरे, मैंने तो इसे शहर में अपना सूट लेने भेजा था। लगता है वापसी में इस पे भूत गया है। 

सेठ:-  रामू, मैं तेरे से डरता नहीं हूँ। अभी के अभी यहाँ से चला जा वरना अच्छा नहीं होगा। 

रामू:- तेरी इतनी हिम्मत।  रुक अभी तुझे बताता हूँ। 

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सेठ:-  रामू, छोड़ हमे। ये सब तू अच्छा नहीं कर रहा। 

सेठानी:- रामू जी, कृपया कर के हमारी जान बक्श दो। आप जो कहोगे हम करेंगे। आज से हम आपके नौकर है। कृपया कर के बस हमारी जान बक्श दो। छोड़ दो हमे। 


रामू उन दोनों को पहले उल्टा लटकाता है और फिर उन्हें घर से बाहर फेक देता है। 

सेठ:- अरे, मर गए रे। इसने तो मेरी कमर ही तोड़ डाली। अये रामू तेरा नास मिटे। 

सेठानी:- अजी, आप ठीक तो है ना। 

सेठ:- अरे, बेवकूफ औरत। तेरे पास क्या सुटो की कमी थी जो तूने उसे आधी रात को शहर में सूट लेने भेज दिया। अब लेले मज़े। 

सेठानी:- अजी, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी जो मैंने इसे सूट लेने भेज दिया। इसने तो हमे घर से ही बाहर निकल दिया। अब हम क्या करे इस रामू का 

सेठ:- अब तो सिर्फ मुखिया जी ही हमारी मदद कर सकते है। चलो हम अभी उनके पास चलते है। 


फिर वो दोनों गांव के मुखिया के पास जाते है। 

सेठ:- मुखिया जी। हम बहुत बड़ी मुसीबत में फस गए है। कृपया कर के मेरी मदद करिये 

मुखिया:- क्या हुआ बेटा ? तुम इतने घबराये हुए क्यों हो ?

सेठ:- अरे मुखिया जी, इस पागल औरत ने हमारे नौकर को आधी रात को जंगल में भेज दिया। उसके ऊपर किसी चुड़ैल का साया गया है। उसने हमे मारा भी और घर से भी निकाल दिया। कृपया करके हमारी मदद कीजिये।

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मुखिया:- बेटा, इसका एक ही हल है। तुम्हे आधी रात को उसी जंगल में जाना पड़ेगा। वहीं तुम्हे इस मुश्किल का हल मिलेगा। 

सेठानी:- अजी, मुझे लगता है कि ये बाबा सठिया गया है जो आधी रात को हमे उस जंगल में भेज रहा है। 

सेठ:- लेकिन मुखिया जी, अगर हम आधी रात को उस जंगल में गए तो हम भी अपने नौकर रामू जैसे बन जायेंगे। जंगल का भूत हमे नहीं छोड़ेगा। आखिर आप आधी रात को हमे जंगल में जाने के लिए क्यों बोल रहे है। 

मुखिया:- उस जंगल में दो भूतो का जोड़ा रहता है। जिसमे से एक चुड़ैल है जो तुम्हारे घर पर है और दूसरा भूत अभी भी उसी जंगल में है। तुम्हे उसी जंगल में जाना है और उस भूत से बात करनी है। वो ही तुम्हारी मदद कर सकता है। 

सेठ:- ठीक है मुखिया जी। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। अब हम चलते है। 


फिर मुखिया जी की बात सुन कर वो वहाँ से चले जाते है। फिर रात होने पर वो दोनों बाते करते है:- 

सेठानी:- अजी, एक काम कीजिये। मैं यही रूकती हूँ। आप उस भूत से जा कर मदद मांगिये। 

सेठ:- वाह वाह, मुर्ख औरत। तूने मुझे भी अपनी तरह मुर्ख समझा हुआ है क्या। चुप-चाप मेरे साथ चलो। मैं अकेला नहीं मरने वाला। चलो मेरे साथ। 


फिर वो दोनों जंगल की ओर चल पड़ते है और कुछ देर जंगल चलने के बाद जंगल पहुँच जाते है। 

सेठ:- अरे भूत जी। आप कहाँ पर है ? हम आप की ही तो तलाश में इस जंगल में आये है। कृपया कर के हमारे सामने आये। 



सेठानी:- अजी, ये एक आदमी का भूत है। आपकी आवाज़ सुन कर सामने नहीं आने वाला। मैं कोशिश कर के देखती हूँ। राजा जी, राजा जी, आप कहाँ है ? देखिये ना मैं आपका कब से इंतज़ार कर रही हूँ। जल्दी आइये ना। और कितना इंतज़ार करवाएंगे। 

सेठ:- क्यों री, पागल औरत। तेरा नास मिटे। तूने कभी मुझे तो इतने प्यार से बुलाया नहीं। भूत जी, आप किसी ग़लतफहमी में मत आना। ये कोई सुन्दर औरत नहीं है। बस मीठी मीठी आवाज़ निकाल रही है। असलियत तो कुछ और ही है। 

सेठानी:- ठीक है, तो आप ही बुला लो उस भूत को। मैं चली वापिस। 

सेठ:- अरे, तुम नाराज़ क्यों होती हो। मैं तो मज़ाक कर रहा था। तुम मुझे इस जंगल में अकेले छोड़ के मत जाओ। मैं तुम्हारा आइंदा से मज़ाक नहीं उड़ाऊंगा। 

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तभी इतना ज़्यादा शोर-शराबा सुन कर वो भूत वहाँ पर जाता है। 

भूत:- कौन हो तुम दोनों ? तुम दोनों की हिम्मत कैसे हुई इस जंगल में आने की। वो भी आधी रात को। 

सेठ:- भूत जी, आपकी पत्नी ने हमारे नौकर के शरीर पर कब्ज़ा कर लिया है। कृपया कर के हमारी मदद कीजिये। 

भूत:- क्या ? क्या तुम जानते हो कि मेरी पत्नी कहाँ है ?

सेठ:- जी हुज़ूर, आपकी पत्नी हमारे ही घर पर है। कृपया कर के आप हमारे साथ चलिए और उसे अपने साथ इस जंगल में ले आये। 

भूत:- मैं कब से अपनी पत्नी को ढूंढ रहा था। चलो मुझे उसके पास ले चलो। 


फिर वो तीनो गांव की तरफ चल पड़ते है और फिर कुछ ही देर में वो तीनो घर पहुँच जाते है। 


सेठ:- भूत जी, देखो आपकी पत्नी इसके अंदर है। 

भूत:- अरे, प्रियतम। तुम मुझे उस जंगल में अकेले क्यों छोड़ आयी। चलो अब जाने का वक़्त हो गया है। इसका शरीर छोड़ दो और मेरे साथ चलो। 

सेठ:- भूत जी, हमे माफ़ कर दो। हम आज के बाद अपने नौकर को नहीं सतायेंगे। 

भूत:- मुझे लगता है इन्हे अपनी गलती का एहसास हो गया है। चलो अब चले। वापस अपने जंगल में। वैसे भी हमारी जगह जंगल में ही है। 

चुड़ैल:- ठीक है। जैसा आप कहे। 


फिर वो चुड़ैल रामू का छोड़ देती है और वो दोनों जंगल में चले जाते है और सब ख़ुशी-ख़ुशी रहने लगते है। 


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दोस्तों आपको हमारी रियल स्टोरी ऑफ़ घोस्ट इन हिंदी कैसी लगी हमे कमेंट में ज़रूर बताइयेगा। इस कहानी को शेयर भी करना।
धन्यवाद। 😊


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Thank You 😊

Also Read:- Real Ghost Stories In Hindi With Pictures. 



2 Comments

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  1. Ha me Hindi kahaniya likha hu aap ko chahiye to contact me vinodsp519@gmail.com

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