Real Ghost Stories In Hindi With Pictures


Real Ghost Stories In Hindi With Pictures


Real Ghost Stories In Hindi With Pictures
  (Real Ghost Stories In Hindi With Pictures)



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नमस्कार,
आज हम रियल घोस्ट स्टोरीज़ इन हिंदी विथ पिक्चर्स लिख रहे हैं। ये रियल घोस्ट स्टोरीज़ इन हिंदी विथ पिक्चर्स आपको अपने जीवन में मदद करेगी। ये रियल घोस्ट स्टोरीज़ इन हिंदी विथ पिक्चर्स सभी के लिए हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक बच्चे, या बड़े, या माता-पिता या शिक्षक हैं। जिनको भी हॉरर स्टोरीज पढ़नी अच्छी लगती है वो सब इसे पढ़ सकती है।
मज़े करो!


यह घटना ब्रिटिश काल की जनवरी 1937 की है। उस समय भारत में ब्रिटिश शाशन था। केंद्रीय सरकार के भारतीय अधिकारी श्री रामा स्वामी शिवलांग आये थे। जो बंगला उन्हें रहने के लिए मिला था, उसमे प्रथम रात्रि को एक महिला की छाया दिखाई दी। साथ ही घंटो की आवाज़ सुनाई दी। 

Real Ghost Stories In Hindi With Pictures
    (Real Ghost Stories In Hindi With Pictures)


इस आवाज़ को सुनते ही श्री रामा स्वामी ने भयभीत हो कर दूसरे ही दिन वो बंगला छोड़ दिया। श्री रामा स्वामी के बंगला छोड़ देने के बाद वो बंगला एक दूसरे मुस्लिम भारतीय अधिकारी को रहने के लिए दे दिया गया। जब ये अधिकारी उस बंगले में रहने गए तो पहले ही दिन ठीक आधी रात के समय एक सफेद-पॉश महिला दिखाई दी। 


घंटो की आवाज़ उसके आने के साथ बंगले में गूँज उठी। महिला की सिसकिया स्पष्ट रूप से सुनाई पड़ रही थी। मुस्लिम अधिकारी उसी समय चितकार करते हुए बंगला छोड़ कर भागे तथा गुप्त आश्चर्य घटना की सूचना पुलिस तथा उच्च अधिकारियों को दी। 


सूचना के उपरान्त एक पुलिस इंस्पेक्टर ने कुछ सिपाहियों के साथ उस बंगले मे गए। रात के ठीक 12 बजे वही सफ़ीद-पॉश महिला ऊंची एड़ी की चप्पलें पहने दिखाई दी। पुलिस इंस्पेक्टर ने रिवॉल्वर से लगातार 5-6 गोलियाँ उस पर चलाई, किन्तु उस पर कोई प्रभाव ना पड़ा। 


पहले सिसकिया तथा फिर ढाका मार कर हसने की आवाज़ तथा बाद में घंटो की आवाज़ सुनते ही इंस्पेक्टर के होश-हवाश उड़ गए। पसीने से लथ-पथ इंस्पेक्टर तथा सिपाही उस बंगले से निकल कर भाग खड़े हुए। इस  घटना से शिमला ही नहीं दिल्ली की केंद्रीय सरकार भी आश्चर्य में पड़ गयी। 


दिल्ली सरकार ने इसकी जाँच के लिए उच्च स्तरीय कार्यवाही करने का आदेश जारी किया। प्रेत आत्मा के इस रहस्य्मय स्वरुप का मज़ाक उड़ाते हुए अंग्रेजी सरकार ने दिल्ली से एक अनुभवी एवं साहसी इंस्पेक्टर आगा के नेतत्र्व में एक पुलिस टीम को घटना की जांच के लिए भेजा। 

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इंस्पेक्टर आगा ने सिपाहियों को बंगले के चारों ओर तैनात कर दिया तथा खुद डाइनिंग टेबल की एक कुर्सी पर बैठ गए। इंस्पेक्टर आगा के कुर्सी पर बैठते ही एक विचित्र बिल्ली उनके पास से उछल-कूद मचाते हुए कमरे में ही गायब हो गयी। वो भयभीत तो हुए लेकिन अपना साहस जुटा कर रिवॉल्वर भर कर सचेत हो कर बैठ गए। 


रात के ठीक 12 बजे उसी सफ़ेद-पॉश महिल की छाया इंस्पेक्टर के आगे दिखाई पड़ी। इंस्पेक्टर आगा ने अपना रिवॉल्वर संभाला ही था कि छाया ने कहा:-

छाया:- ठहरिए। आप एक नेक तथा चरित्रवान अधिकारी है। मुझ अबला पर बिना किसी कारण क्रोध क्यों करते है ? वैसे आपका रिवॉल्वर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। 


ये सुन कर इंस्पेक्टर आगा सहम गए तथा नम्रता से बोले:-

इंस्पेक्टर:- आप कौन है ? कृपया मुझे अपना परिचय देंगी। 

छाया:- मैं एक पीड़ित औरत हुँ। क्या आप मेरी पीड़ा दूर करने में मदद कर सकेंगे। यदि आप वायदा करते है तो मैं आपको एक बहुत बड़ा रहस्य बताउंगी 

इंस्पेक्टर:- मैं आपसे वायदा करता हुँ। मैं आपकी पूरी मदद करने की कोशिश करूंगा। 


आश्वासन पा कर छाया ने अपनी दुःख-भरी कहानी सुनाई। 

छाया:- मैं एक पहाड़ी लड़की थी। शादी से पहले का मेरा नाम आवेरी था। मेरी माँ वेश्या का धंधा करती थी। मेरी सुंदरता को देख शिमला में आये आइजीक मुझ  पर मोहित हो गए। आइजीक तथा मेरी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गयी। 

माँ के विरोध के बावजूद मैंने तथा आइजीक ने कोर्ट मैरिज कर ली। आइजीक को भी अपने माता-पिता का विरोध सहना पड़ा। ये बंगला उस वक़्त आइजीक का ही था तथा हम दोनों इसी में रहते थे। मेरी माँ मुझे भी एक वैश्या के रूप में देखना चाहती थी किन्तु मैंने वैसा ना करने का संकल्प कर लिया था। 

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इंस्पेक्टर:- फिर आगे क्या हुआ ?

छाया:- कुछ दिनों बाद मैं गर्बवति हो गयी थी तो मेरी माँ ने आइजीक से संबंध तोड़ने के लिए मुझ पर दबाव डाला क्योंकि उसकी नज़र में पैसो का महत्व अधिक था तथा मुझे प्रेम महत्वपूर्ण जान पड़ा। मैंने माँ की बात को नहीं माना। इसी दरमियाँ आइजीक के पिता का तार आया, जिसमे उसे तुरंत बुलाया गया था। 

आइजीक ने मुझे बताया कि अगर वो नहीं गया तो उसके पिता की लाखो की सम्पत्ति उसके हाथो से निकल जाएगी। मैंने उसे प्रसन्नता-पूर्वक विदा किया तथा बंगले में अकेले रहने लगी। लगभग दो महीने बाद आइजीक वापिस आया तथा प्रेम-प्रदर्शित करते हुए चुम्बन लेने के बहाने मेरे गले में रुमाल फसा कर मेरी हत्या कर दी। 

इंस्पेक्टर:- आगे क्या हुआ ? बताओ। 

छाया:- हां, सुनिए। मेरी लाश पीछे वाले कमरे के बीचो-बीच गढ़ी है। पलस्तर उखाड़ने पर एक पत्थर के नीचे मेरे शव के कुछ भाग अब भी मिल जायेंगे। आइजीक का रुमाल तथा जेब का कुछ सामान भी उसी में पड़े मिल जायेंगे। इंस्पेक्टर साहब मैं चाहती हुँ कि आइजीक पर मुकद्म्मा चला कर उसे प्राण-ढंड दिलाया जाये। इस संबंध में मैं आपकी हर संभव सहायता करूंगी। 


दोस्तों इतना कह कर वो छाया गायब हो गयी। इंस्पेक्टर आगा ने आवेरी के पुरे कथनो को नोट कर लिया तथा अपने उच्च अधिकारियों को इस घटना से अवगत कराया। फ़ौरन इस बात की सत्यता का पता लगाने के लिए एक मजिस्ट्रेट समक्ष उस कमरे की खुदाई की गयी। 


एक महिला के शव के साथ एक रुमाल तथा अन्य सामान भी मिला। इतना प्रमाण मिलने पर आइजीक के विरुद्ध हत्या का मुकददमा दर्ज करा दिया गया। मुकददमे में आइजीक के वकील ने कहा:-

वकील:- यदि ये बया जो इंस्पेक्टर आगा ने नोट किये है आवेरी के है तो उसमे उसके हस्ताक्षर क्यों नहीं है। 


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इंस्पेक्टर आगा ने समय माँगा तथा दूसरे दिन उसी बंगले में आवेरी की छाया की प्रतीक्षा करने लगे। किन्तु छाया समय से पहले ही उस कमरे में उपस्थित थी। उसने गलती स्वीकार करते हुए कहा:-

छाया:- आगा साहब, आप कागज़ टेबल पर रख दो। मैं हस्ताक्षर कर देती हुँ। 


इंस्पेक्टर आगा ने उसके कहे अनुसार कागज़ टेबल पर रख दिया और देखता रहा। कागज़ पर लिखा गया "मैं  ब्यान देती हुँ कि मैंने जो कथन इंस्पेक्टर के समक्ष दिए है, वे मेरे ही है। इन बयानों में मेरे ही हस्ताक्षर है। हस्ताक्षर आवेरी।  

अगले दिन कोर्ट खुलते ही मामला पेश हुआ। वकील तथा जज सभी आश्चर्य-चकित थे। ठीक वहीं हस्ताक्षर जज की फाइल में बंद आवेरी के बयानों में भी पाए गए। पुनः बचाव पक्ष के वकील ने प्रश्न किया। यदि आवेरी हस्ताक्षर कर सकती है तो कोर्ट में कर ब्यान दे या कोई ऐसा प्रमाण या सबूत दे, जिससे ये विश्वास किया जा सके कि वे हस्ताक्षर आवेरी के ही है  


समय मांग कर इंस्पेक्टर आगा वापिस रात में आवेरी से मिलने गया तथा उसे सारी बात बताई तो आवेरी ने बॉम्बे से भेजा गया आइजीक के पिता का तार और कोर्ट मैरिज के कागज़ात के बारे में बताया तथा उन्हें कहाँ बंगले में रखा गया है। 


आवेरी ने ये भी बताया कि आइजीक के पिता की मृत्यु पहले ही हो चुकी थी। ये झूठा तथा फ़र्ज़ी तार आइजीक ने मुझसे पीछा छुड़ाने के लिए मंगवाया था। कोर्ट में पहुँच कर इंस्पेक्टर आगा आइजीक के नाम का जाली तार और विवाह के कागज़ात प्रस्तुत किये। 

  
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आइजीक ना तो ये सिद्ध कर सका कि उसने आवेरी को तलाक दिया था, ना ही यह बता सका कि वो कहाँ है। अंततः आइजीक ने अपने अपराध स्वीकार कर लिया और उसे फ़ासी की सजा सुना दी गयी। प्राण-दंड के निर्णय के दिन इंस्पेक्टर आगा पुनः उस बंगले में गए। जब वो उसी कमरे में आवेरी का इंतज़ार कर रहे थे तो अचानक उन्हें नींद की झपकी गयी। 


सपने में आवेरी की छाया ने उन्हें धन्यवाद दिया तथा कहाँ:-

छाया:- अब मेरी आत्मा को पूर्ण शान्ति मिल गयी है तथा अब इस छाया शरीर से मुक्त हो रही हुँ। अतः भविष्य में आपसे ना मिल सकूंगी। आपने जो कुछ भी मेरे लिए किया है इस एहसान का बदला मैं नहीं चूका सकूंगी। परन्तु मेरी ये इच्छा है कि बैडरूम के पीछे वाली खिड़की के नीचे एक बक्सा गढ़ा है। उसे आप खोद कर निकाल ले तथा अपनी धर्मपत्नी को मेरी हार्दिक भेट के रूप में देदे। 


इतना कह कर वो छाया गायब हो गयी। सुबह होने पर इंस्पेक्टर आगा ने वो स्थान खुदवाया। वास्तव में उस स्थान पर एक बक्सा निकला जिसमे लगभग चालीस हज़ार रुपय के सोने के गहने थे। इंस्पेक्टर आगा ने पूरी ईमानदारी के साथ बक्से को सरकारी खजाने में जमा कर दिया परन्तु अंग्रेजी सरकार ने इंस्पेक्टर आगा की ईमानदारी तथा सफल प्रयासों के पुरस्कार स्वरुप वो पूरी सम्पत्ति उन्ही को दे दी। 


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दोस्तों आपको हमारी रियल घोस्ट स्टोरीज इन हिंदी विथ पिक्चर्स कैसी लगी हमे कमेंट में ज़रूर बताइयेगा। इस कहानी को शेयर भी करना।
धन्यवाद। 😊


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Also Read:- Panchatantra Short Stories In Hindi With Moral. 

2 Comments

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  1. Hi, very good article thanks for sharing.
    You are excellent blogger

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  2. Hello,
    Thanks for appreciating us. Please also visit our some new stories.
    Thank You.

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