Moral Story In Hindi

Moral Story In Hindi


Hello Friends,
Today we are writing Moral Story In Hindi. This Moral Story In Hindi will help you in your life. This Moral Story In Hindi is for everyone. No matter you are a kid, or elder, or parent or teacher. If you are a teacher so you can teach your students the same morals.
Have Fun!


नमस्कार दोस्तों,
आज हम Moral Story In Hindi लिख रहे हैं। ये Moral Story In Hindi आपके जीवन में आपकी मदद करेंगे। सत्य की ये नैतिक कहानी हिंदी में सभी के लिए हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप एक बच्चे, या बड़े, या माता-पिता या शिक्षक हैं। यदि आप एक शिक्षक हैं तो आप अपने छात्रों को समान नैतिकता सिखा सकते हैं।
मज़े करो!


Sneaky Stone - डरपोक पत्थर Moral Story In Hindi



Moral Story In Hindi
(Moral Story In Hindi) 


एक गांव था। वहाँ एक मूर्तिकार रहता था। उसका नाम था मोहन। एक बार मूर्ति बनाने के लिए उसे कुछ पत्थरों की ज़रूरत थी तो वह जंगल की और जाता है। वह जंगल में इधर-उधर पत्थर की तलाश करता है तो उसे एक पत्थर दिखाई देता है जो मूर्ति बनाने के लिए एकदम सही था। वह उस पत्थर को उठा कर अपनी गाडी में रख लेता है।

कुछ दूर जाने पे उसे एक और पत्थर दिखाई देता है और वह उसे भी उठा कर अपनी गाडी में रख लेता है और अपने गांव की और चल देता है। जब वह पत्थर को चोट मारने लगता है, तभी उस पत्थर में से आवाज़ आने लगती है:- रुको, रुको, कृपया करके रुको।

मूर्तिकार इधर-उधर देखता है। उसे समझ नहीं आता है कि यह आवाज़ कहाँ से आती है। इतनी ही देर में पत्थर फिर से बोला:-

पत्थर:- रुको, रुको, कृपया करके मुझ पे हथोड़ा मत चलाओ। मुझे हथोड़े की मार से बहुत डर लगता है। अगर तुम मुझ पे हथोड़ा चलाओगे तो मैं टूट जाऊंगा। बिखर जाऊंगा। कृपया करके मुझे छोड़ दो और किसी और पत्थर से मूर्ति बना लो।

उसे उस पत्थर पर दया आ जाती है और वह उस पत्थर को छोड़ कर दूसरा पत्थर उठा लेता है। वह पत्थर पर ज़ोर-ज़ोर से चोट करना शुरू कर देता है और इस बार पत्थर से कोई आवाज़ भी नहीं आती है। कुछ ही देर में मूर्ति बन कर तैयार हो जाती है।

कुछ दिनों के बाद गांव के मंदिर में मूर्ति स्थापना का दिन आता है। कुछ गांव वाले मूर्तिकार के घर जाते है और उससे पूछते है कि

Moral Story In Hindi
(Moral Story In Hindi) 


गांव वाले:- अरे भाई मोहन, क्या तुमने मूर्ति बना दी मंदिर में स्थापना के लिए।

मोहन:- हां, हां, वो तो मैंने दो दिन पहले ही बना दी थी। मैं तो आपका ही इंतज़ार कर रहा था।

गांव वाले:- अरे वाह! ये तो बहुत अच्छी बात है मोहन। चलो हम सब ये मूर्ति उठा कर उस मंदिर में स्थापना के लिए चलते है।

मोहन:- अरे भाई, रुको, रुको। मूर्ति के आगे एक पत्थर और भी तो रखना पड़ेगा। जिस पे लोग नारियल फोड़ सके।


वो इधर-उधर देखता है ताकि उसे कोई पत्थर मिल सके। तभी उसकी नज़र उस पत्थर पर पड़ती है, जिसे मूर्तिकार ने छोड़ दिया था और वो उस पत्थर को उठा लेता है। वह मन-ही-मन सोचता है कि ये पत्थर सही है और मज़बूत भी लग रहा है। इस पर जब लोग नारियल फोड़ेंगे तो नारियल झट से फुट जायेगा। सब गांव वाले मंदिर की और चल देते है।

तब उस पत्थर में से ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ आने लगी।

पत्थर:- अरे रुको रुको। मुर्ख लोगो। मुझे कहाँ ले कर जा रहे हो। हे भगवान, मुझे बचाओ। मुझे तो कही नहीं जाना है। मुझे तो कठिन परिस्तिथियों से बहुत डर लगता है। मैं इन का सामना कभी नहीं कर सकता। हे भगवान, मुझे बचाओ। आज तो मैं मर ही गया। हे भगवान, मुझे बचाओ। बचाओ, बचाओ।

रास्ते भर वह पत्थर बहुत ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाता है। तभी सब गांव वाले मंदिर पहुँच जाते है और मूर्ति की स्थापना  कर देते है और उस पत्थर को उसके आगे रख देते है। फिर सब लोग उस मूर्ति  करना शुरू कर देते है। मूर्ति बना हुआ पत्थर इससे बहुत खुश हो जाता है।


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(Moral Story In Hindi) 


लोग उस पत्थर को दूध से स्नान करवाते है। उसे चन्दन का लेप लगाते है और उसके ऊपर फूल चढ़ाते है। ये सब देख कर पत्थर मूर्ति बने हुए दूसरे पत्थर से बोलता है।

पत्थर:- अरे भाई, तुम्हारे तो बहुत मज़े है। लोग तुम्हे तो दूध से स्नान करवा रहे है। तुम्हारी पूजा कर रहे है। तुम्हारे ऊपर फूलों की बारिश कर रहे है। तुम्हारी ज़िंदगी तो बढ़िया है।

तभी एक व्यक्ति उस पत्थर पर ज़ोर से नारियल फोड़ता है और पत्थर चिल्लाने लगता है।

पत्थर:- अरे, मर गया। हाय! मैं तो मर गया। हाय! मेरी कमर तो टूट ही गयी। हे भगवान, मुझे बचाओ। अरे, मुर्ख व्यक्ति मेरे ऊपर नारियल क्यों फोड़ रहा है। भगवान को नारियल चढ़ाने का इतना ही शौक है तो अपने सर से क्यों नहीं फोड़ लेता तू नारियल।

तभी एक और व्यक्ति उस पत्थर पर नारियल फोड़ता है और पत्थर और तेज़ चिल्लाने लगता है।

पत्थर:- हाय! हाय! मर गया। आज तो मेरी शामत ही आ गयी। हे भगवान, मुझे कहाँ फसा दिया आज आपने ?
मैं तो जंगल में पेड़ की छाओं नीचे मज़े से आराम कर रहा था। यह आपने मुझे कहाँ फसा दिया। हाय! हाय! मैं तो मर ही गया। ये सारे मुर्ख व्यक्ति मेरे ऊपर बार-बार नारियल फोड़-फोड़ कर मुझे मार ही डालेंगे।


यह सब देख कर मूर्ति बना पत्थर उस पर ज़ोर-ज़ोर से हँसा।

पत्थर:- तुम तो खुश होंगे ही। तुम्हारी सेवा जो हो रही है। तुम्हे तो मिठाईया खाने को मिल रही है और यहाँ तो मेरी कमर की हालत बिगाड़ दी इन इंसानो ने। हाय! हाय! बहुत दर्द हो रहा है। कोई मरहम ही लगा दो।

Moral Story In Hindi
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मूर्ति:- दोस्त तुमने भी अगर उस दिन पहला प्रहार सेह लिया होता तो आज तुम मेरी जगह होते और लोग तुम्हारी भी पूजा कर रहे होते। तुम्हे भी दूध, मख्खन से स्नान करवा रहे होते। तुम्हारी भी पूजा हो रही होती, लेकिन तुम उस दिन डर गए। तुमने उस दिन आसान रास्ता चुना और आज तुम्हे कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हम जब भी किसी परिस्तिथि से डर के कोई भी आसान रास्ता चुनते है तो उस वक़्त तो हमे बहुत सुकून और आराम मिलता है पल भर के लिए ख़ुशी भी मिल जाती है, किन्तु आगे की राह और भी ज़्यादा कठिन हो जाती है मेरे दोस्त।

तब उस पत्थर को अपनी भूल का एहसास होता है और वह मूर्ति बने पत्थर से बोलता है:-

पत्थर:- मुझसे गलती हो गयी। मैं समझ चूका हुँ। जो लोग मुश्किल परिस्तिथियों से नहीं घबराते और उनका सामना करते है। लोग उन्ही को सम्मान देते है और उन्ही की पूजा करते है। आपने उस हथोड़े की चोट सही कठिन परिस्तिथियों का सामना किया इसलिए लोग आज आपकी पूजा-अर्चना कर रहे है। आप अवश्य ही ईश्वर है भगवान। मैं आपकी शरण में आना चाहता हुँ। मुझे आप अपनी शरण में ले लीजिये। मुझे अपनी गलती का एहसास हो चूका है। मैं अब किसी भी कठिन परिस्तिथि से नहीं घबराऊँगा भगवान। मुझे शक्ति दे भगवान।

मूर्ति:- जो व्यक्ति ज़िंदगी में मेहनत करता है। सही रास्ते पे चलता है और कठिन परिस्तिथियों से नहीं घबराता और ढृढ़ता से उसका सामना करता है। मैं हमेशा उसके साथ रहता हुँ।

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(Moral Story In Hindi) 


तभी एक व्यक्ति उस पत्थर पर ज़ोर से नारियल फोड़ता है। इस बार वह पत्थर अपनी आँखे बंद करके जय श्री राम, जय श्री राम, जय श्री राम बोलता है और नारियल फुट जाता है। जब वो पत्थर अपनी आँखे खोलता है और देखता है की नारियल तो फुट गया और इस बार उसे बिलकुल भी दर्द नहीं हुआ तो वह भगवान का शुक्रिया अदा करता है। और भगवान को वचन देता है।

पत्थर:- हे भगवान, मैं आगे से कभी भी किसी भी कठिन परिस्तिथियों से नहीं भागूंगा। बस आप हमेशा मेरे साथ रहिएगा।


नारियल फूटने की वजह से नारियल का पानी भी उस पत्थर को पीने के लिए मिल जाता है और लोग भगवान को भोग लगाने के बाद मिठाई को भी उस पत्थर पर रख देते है। जिससे उस पत्थर को मिठाई भी खाने को मिल जाती है। तब भगवान उसे बोलते है।

मूर्ति:- देखा तुमने, आज मुश्किलों का सामना किया तो उसका फल भी तुम्हे मिलने लगा है। हैना ?

पत्थर:- हां भगवान, आप सही कह रहे हो।


कहानी की सीख़:- कठिन वक़्त सबकी ज़िंदगी में आता है। आज नहीं तो कल ज़रूर आएगा, लेकिन उस कठिन वक़्त का सामना करने के लिए क्या आप तैयार है ? अपनी ज़िंदगी का मज़ा ज़रूर लीजिये लेकिन आगे आने वाले कठिन दिनों की तैयारी करने के बाद क्योंकि जब कठिन वक़्त आता है तो फिर आपको मौका नहीं मिलेगा। एक बार सोचना ज़रूर। 

अक्सर चुनोतियों से संघर्षो से हम डरते है लेकिन संघर्ष ही तो है जो हमे और अधिक मज़बूत करते हैं और ज़िंदगी की कठिनाइयों से लड़ने की हिम्मत देते है और हमे सक्षम बनाते है कुछ भी कर पाने के और कुछ भी कर गुजरने के इसलिए ज़िंदगी में कभी भी कोई चुनौती आयी तो उससे घबराइए मत। बल्कि हसकर उसका सामना कीजिए। 

ये कहानी अगर कही-ना-कही आपके दिल को छुए तो इसे शेयर ज़रूर करियेगा और कमेंट में अपनी भावनाये भी बताइयेगा। 

धन्यवाद। 

Also Read:- Hindi Story With Moral.

2 Comments

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  1. Replies
    1. Dhnywaad. Aap hmari aur bhi nyi kahaniya zroor pdhiyega aur hme comments me zroor btaiyega ki aapko vo sab kaisi lgi.

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