Moral Stories In Hindi

Moral Stories In Hindi


Today we are writing Moral Stories in Hindi. These Moral Stories in Hindi are for everyone but most especially for kids. These Moral Stories in Hindi may also be helpful for all. Like:- Kids, Parents, Elders, and teachers to teach kids. 



We are writing the Short Moral Stories in Hindi Here. ⬇️ 



  • Goldfish - सोने की मछली 
  • Golden Egg - सोने का अंडा 
  • Punctual - समय की समझ 
  • Thirsty Crow - प्यासा कौवा  
  • Greedy Dog - लालची कुत्ता 
  • Rabbit And Tortoise Story - खरगोश और कछुए की कहानी


We write 6 Moral Stories in Hindi below. I hope you will like all the stories.



Goldfish - सोने की मछली 
(Moral Stories In Hindi)


Moral Stories In Hindi
(Moral Stories In Hindi)


कई साल पहले लिंगापुर नाम के एक गांव में सोमबैया नाम का एक मछुआरा मछलियाँ पकड़ता था और ज़िंदगी व्यतीत करता था। वो मछलिया पकड़ने गांव के बाहर एक नदी में जाल डालता था और सोमबैया रोज़ केवल दो ही मछलियाँ पकड़ता था। जब जाल में ज़्यादा मछलियाँ फस जाती तो वो दो को छोड़कर बाकि मछलियों को नदी में वापिस फेक देता। फिर उन मछलियों को बाज़ार में बेच कर जो पैसे मिलते उससे अपना घर चलाता। एक दिन उसकी बीवी ने उससे कहा :-

बीवी:- आप थोड़ी ज़्यादा मछलियाँ क्यों नहीं पकड़ के लाते? उन्हें बेच कर हम और ज़्यादा पैसे कमा सकते है। 

उसकी बीवी उससे झगड़ा करती थी। ऐसे ही उसने एक दिन नदी में जाल डाला पर उस दिन जाल में कोई मछली नहीं फसी। वो बेचारा मनमरा हो कर वापिस लोट आया। फिर एक जगह बैठ कर सोचने लगा की क्या किया जाये। इसी तरह कई दिन गुज़र गए उसे कोई मछली नहीं मिलती थी। एक दिन वो नदी किनारे पत्थर पर जा बैठा और दुखी मन से रोते हुए सोचने लगा :-

मछुआरा :- अरे मैंने क्या गलती की है कि मेरे जाल में एक भी मछली नहीं फस्ती है। मैं तो रोज़ बस दो ही मछली पकड़ता था। अब मेरी ज़िंदगी कैसे गुज़रेगी? 

वो सोच ही रहा था इतने में ही नदी में से एक बड़ी सी मछली ऊपर उठ आयी। उसने कहा 

मछली:- मैं इस नदी का राजा हूँ। जब तुम मछली पकड़ते हो, मैं तुम पर नज़र रखता हुँ। मैंने देखा है तुम लोभी नहीं हो। सिर्फ दो ही  पकड़ते हो। इससे मैं और मेरी मछली प्रजा बहुत खुश है। मुझे तुम्हारी परिस्तिथि पर दया आती है इसलिए आज से हर रोज़ मैं तुम्हे एक सोने की मछली (Goldfish) दे दिया करूंगा। तुम उसे बेच कर ज़िंदगी बिता लेना। मैं आशा करता हुँ कि इससे तुम्हारी ज़िंदगी सुधर जाएगी। 

ये कह कर वो मछली राजा पानी के अंदर चला गया। उस दिन मछुआरे ने जब जाल डाला तो जाल में एक सोने की मछली (Goldfish) फसी। उसे वो ले जा कर बाजार में बेच आया। उसे काफी पैसे मिले। इस तरह हर रोज़ सोने की मछली (Goldfish) मिलती रही और धीरे-धीरे वो काफी अमीर बनने लगा पर वो अपना कर्तव्य नहीं भूला। जिस नदी की वजह से वो इतना अमीर बना उस नदी में मछलियों की संख्या बढ़ाने के लिए हर रोज़ मछलियों का चारा वहाँ डालता। 


कहानी की सीख़ :- ईमानदारी का फल हमेशा मिलता है। 

The moral of this small story in Hindi:- Honesty Always Results.  



GOLDEN EGG - सोने का अंडा 
(Moral Stories In Hindi)


Moral Stories In Hindi
(Moral Stories In Hindi)


एक बार एक किसान के हाथ एक ऐसी मुर्गी लगी जो रोज़ एक सोने का अंडा (Golden Egg) देती थी। वो उसे बेच कर खूब धन इखट्टा करता था और नई-नई वस्तुएँ अपने परिवार के लिए लाता था। धीरे-धीरे वो गांव में सबसे ज़्यादा अमीर हो गया। नया घर, कई घोड़े, बहुत सारे खेत और बहुत सारी गाय भैसो का वो मालिक हो गया था। एक बार उसने सोचा कि मुर्गी रोज़ एक ही अंडा पैदा करती है और अपनी पत्नी से बोला :-

किसान:- ना जाने उसके पेट में कितने सारे अंडे होंगे। 

पत्नी:- लेकिन वो सारे अंडे निकाले कैसे?

किसान:- करना क्या है? उसका पेट काट डालते है और सारे अंडे निकाल लेते है। 

पत्नी:- हां यह ठीक रहेगा। 


दोनों ने मुर्गी को बिच में से काट दिया। फिर उन्हें मिलना ही क्या था। रोज़ जो एक अंडा मिलता था वो उससे भी हाथ धो बैठे। 


कहानी की सीख़:- लालच बुरी बला  है। 

The moral of this small story in Hindi:- Greed is Bad. 


Punctual - समय ही धन है (Moral Stories In Hindi)


Moral Stories In Hindi
(Moral Stories In Hindi)




अजय पाठशाल से घर लोटा तो माँ ने उससे पूछा :- 

माँ:- अजय बेटा, क्या हुआ? परीक्षा में प्रशन-पत्र ठीक नहीं था क्या 

अजय:- माँ, मैं स्कूल देर से पहुँचा। मेरी बस छूट गयी थी। 

पिता:- बेटा, समय की परवाह करनी चाहिए। समय का बड़ा महत्त्व है। 

अजय:- पिता जी, समय न रहते मैं पूरा प्रशन-पत्र हल नहीं कर पाया। आखिरी प्रशन रह गया। 

पिता:- तुम्हे पता है कि वक़्त पर स्टेशन ना पहुँचे तो गाडी छूट जाती है। 

माँ:- अजय ये सच है कि समय के अभाव में अच्छे-अच्छे मौके अपने हाथ से निकल जाते है। 

पिता:- इसलिए बड़े-बूढ़े कहते है कि समय ही धन है। वह अनमोल है। 

अजय:- माँ, मैं वादा करता हुँ। मैं अब से अपना हर काम ठीक समय पर ही करूंगा। 

माँ:- बेटा, सभी महा-पुरुष समय की पाबंद (Punctual) थे। जैसे :- महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्री, डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद आदि सभी समय के पाबंद (Punctual) थे। वे अपना-अपना काम ठीक समय पर करते थे। उनके जीवन में आलस्य का कोई स्थान नहीं था। इसलिए उन्हें जीवन में सफलता मिली थी। 

पिता:- जो हुआ, सो हुआ। अजय तुम जाओ हाथ-मुँह धो कर नाश्ता कर लो। 


कहानी की सीख़:- समय ही धन है। 

The moral of this small story in Hindi:- Time Is Money.




Thirsty Crow - प्यासा कौवा(Moral Stories In Hindi)


Moral Stories In Hindi
(Moral Stories In Hindi)



 गर्मियों के दिन थे। एक प्यासा कौवा (Thirsty Crow) पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ रहा था। गर्मी के कारण उसका हाल-बेहाल था। कौवे ने सोचा 

कौवा:- अगर मुझे थोड़ी देर और पानी नहीं मिला तो मैं पक्का ही मर जाऊंगा। 

तुरंत ही उसकी नज़र पेड़ के पास रखे मटके की तरफ गयी। मटका देखते ही वह अत्यंत खुश हुआ और गाने लगा:- 

कौवा:- काओ-काओ, मीठा पानी, ठंडा पानी, वाओ-वाओ। काओ-काओ मीठा पानी, ठंडा पानी, वाओ वाओ। जल्दी से जाऊ, जल्दी से जाऊ और जा कर मैं अपनी प्यास बुझाउ। ओये काऊ काऊ। अब मेरी प्यास ज़रूर मिट जाएगी और मैं मरने से बच जाऊंगा। 

परन्तु जैसे ही उसने मटके के अंदर देखा। वह बहुत निराश हुआ। 

कौवा:- अरे आज तो मर गए। ईश्वर ने पानी तो दिया पर इतना कम कि मैं उसे पी ही नहीं सकता। 


वह मायूस हो कर सोचने लगा। तुरंत ही उसकी नज़र पास ही पड़े कंकड़ों पर पड़ी। वह बहुत खुश हुआ और बोला:-

कौवा:- वाह-वाह क्या विचार आया है। अब मैं ज़रूर बच जाऊंगा और मेरी प्यास बुझ जाएगी। 

कौवा फुर्ती से कंकर मटके में डालने लगा। थोड़ी देर बाद ही पानी ऊपर आ गया और प्यासे कौवे (Thirsty Crow) ने अपनी प्यास बुझा ली। 



 कहानी की सीख़:- बुद्धि से आप सब कुछ पा सकते है। 

The moral of this small story in Hindi:- With Intelligence You Can Achieve Everything. 





Greedy Dog - लालची कुत्ता(Moral Stories In Hindi)


Moral Stories In Hindi
(Moral Stories In Hindi)


एक छोटे से गांव में एक किसान रहता था। उसका एक पालतू और वफादार कुत्ता था। एक दिन किसान जल्द-बाज़ी में अपने कुत्ते को खाना देना ही भूल गया और अपनी फसल बेचने बाजार की तरफ निकल गया। बेचारा कुत्ता भूख के मारे इधर-उधर भटक रहा था। अचानक से उसे एक हड्डी मिली। उसकी ख़ुशी का ठिकाना ना  रहा। हड्डी देख कर उसके मुँह में पानी आ गया और उसने सोचा कि वह उसे से नदी के पास ले जा कर खायेगा। 

मुँह में हड्डी लिए ख़ुशी से अपनी पूछ हिलाते हुए वो नदी की और चल पड़ा। नदी के किनारे पहुँच कर उसने इधर-उधर देखा। वो हड्डी खाने ही जा रहा था कि तभी उसने पानी में अपनी परछाई देखी। उसने अपनी परछाई को दूसरा कुत्ता समझ लिया। उसने सोचा क्यों ना मैं इसकी हड्डी छीन लू और फिर मज़े से दो-दो हड्डियाँ खाऊ। वो उसे डराने के लिए भोंका और जैसे ही उसने अपना मुँह खोला उसकी हड्डी पानी में गिर कर बह गयी। बेचारा कुत्ता लालच में आ कर अपने मुँह की हड्डी भी खो बैठा और भूखा भी रह गया। 



कहानी की सीख़:-  ज़्यादा लालच से अपना ही नुक्सान होता है। 

The moral of this small story in Hindi:- More Greed Hurt Itself. 



Rabbit And Tortoise Story - खरगोश और कछुए की कहानी(Moral Stories In Hindi)


Moral Stories In Hindi
(Moral Stories In Hindi)



एक जंगल में एक कछुआ और खरगोश रहते थे। खरगोश को बहुत घमंड था कि वो बहुत तेज़ चल सकता है। वो खरगोश की धीमे चाल को देख कर खिल्ली उड़ाता था। ऐसे में एक दिन खरगोश बोला:- 

खरगोश:- क्यों कछुआ काका। क्या तुम मेरे साथ दौड़ लगाओगे? 

कछुआ:- क्यों नहीं।

खरगोश:- हम दोनों में जो जीतेगा उसे बढ़िया इनाम मिलेगा। 

कछुआ:- ऐसा ही सही। 

अब इस दौड़ को देखने के लिए जंगल के सभी जानवर बड़ी उत्सुकता से वहाँ पहुँचे। 

खरगोश:- हम दोनों में से जो पहले उस दूर वाली पहाड़ी पर पहुंचेगा, समझो वो जीता। 

कछुआ:- ठीक है। 

दौड़ शुरू हुई। खरगोश तेज़ दौड़ने लगा। कछुआ धीरे-धीरे चलने लगा। खरगोश और तेज़ दौड़ने लगा। कछुआ वही धीरे-धीरे चलता रहा। इसी तरह थोड़ी दूर जाने के बाद खरगोश ने पीछे मुड़ कर देखा तो उसे कछुआ कहीं दिखाई नहीं दिया। 

खरगोश:- ये कछुआ अभी नहीं आने वाला है। चलो थोड़ी देर आराम किया जाये। 

आराम करते-करते कछुए की आँख लग गयी। कछुआ धीरे-धीरे खरगोश के पास पहुंचा और चुप-चाप उसे पार कर चला गया। कुछ देर बाद जब खरगोश की आँख खुली और उठ कर वो पहाड़ की और दौड़ने लगा। वहाँ पहुंच कर उसने कछुए को देखा तो कहा:-

खरगोश:- दोस्त, तुम ही जीते। मुझे माफ़ कर दो।  



कहानी की सीख़:- घमंड करना अच्छी बात नहीं है। 

The moral of this small story in Hindi:- Boasting Is Not a Good Thing. 


I hope you like all Moral Stories In Hindi. Tell us which story you like the most. If you really like these stories and fount that the moral of the stories are very nice so please comment below. ⬇️

Thank You. 😊


हमें उम्मीद है कि आपको सभी कहानियाँ बहुत अच्छी लगी होगी। हमे बताइयेगा कि आपको सबसे अच्छी कहानी कोनसी लगी। अगर आपको यह कहानियाँ अच्छी लगी और आपको लगता है कि सभी की सीख़ हमारे जीवन को सुधारने के लिए अच्छी तो तो प्लीज निचे कमैंट्स ज़रूर करना। 

धन्यवाद। 😊


Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.