जलपरी - Jalpari

जलपरी - Jalpari  


जलपरी - Jalpari

यह एक नन्ही जलपरी की कहानी है कि कैसे उसे उसका सच्चा प्यार इंसानी रूप में मिलता है। आइये देखते है आखिर ये होता कैसे है। 


आज मत्स्य लोक में वहाँ की रानी ने मत्स्य लोक की राजकुमारी को जन्म दिया था। पुरे मत्स्य लोक में खुशियाँ मनाई जा रही थी, किन्तु तभी महारानी ने राज्य की सभी मत्स्य कन्याओं को अपने पास आने का आदेश दिया। और वो बोली :-

महारानी :- सुमि, तुम मेरी सबसे प्रिय सखी हो और इस लोक की मंत्री भी हो। मेरे बाद तुम ही सबसे ज़्यादा शक्तिशाली हो। मैं तुम्हे और अपनी सभी दासियो को और प्रिय राजा को अपना एक राज़ बताना चाहती हुँ और चाहती हुँ कि ये राज़ मेरी बेटी को कभी भी पता ना चले। क्या आप सब मुझे सच्चे मन से वचन दे सकते है। 


महारानी की बात सुनते ही सभी मत्स्य कन्याएँ एक स्वर में बोली :-

मत्स्य कन्याएँ:- महारानी, आपके लिए हमारी जान भी हाज़िर है, वचन तो एक बहुत छोटी-सी चीज़ है। अगर आप कहे तो हम आपके लिए अपने प्राण भी दे सकते है। 
  

यह सुनकर महारानी बहुत खुश हुई और बोली :- 

महारानी :- ऐसी बात है तो सुनो। मेरा विवाह परी लोक के राजा सुशांत से होने वाला था, किन्तु उनकी सौतेली माँ ने उन्हें ऐसा करने की आज्ञा नहीं दी बल्कि उन्होंने कहाँ कि यदि मेरे और सुशांत के विवाह के द्वारा किसी पुत्री का जन्म होगा तो उसे उनके बड़े पुत्र से विवाह करना होगा। आप लोग जानते है कि हम मत्स्य कन्याएँ हज़ारों-लाखो वर्षो तक जीवित रहते है और ऐसा ही परी लोक वासियो के साथ भी होता है और वे राजकुमारी का पता मिलते ही उन्हें ढूंढ सकते है। मैं नहीं चाहती कि मेरी बेटी का विवाह राजकुमार सुशांत के बड़े भाई से हो और इसीलिए मैंने राजकुमार सुशांत से विवाह भी नहीं किया। किन्तु उन्होंने अपनी जादुई शक्तियों द्वारा मुझे प्रेम निशानी के रूप में यह राजकुमारी दे दी। किन्तु मुझे डर है कि यदि यह बात सुशांत की माता को पता चल जाएगी तो वो मुझसे मेरी बेटी को छीन लेंगी। मैं अपनी जादुई शक्तियों से मत्स्य लोक को पानी के जादुई शीशे से पूरी तरह से बंद कर दूंगी। जिससे मेरी प्रजा को कोई नुक्सान नहीं पहुंचा पायेगा। और मेरी बेटी भी सुरक्षित रहेगी। मंत्री सुमि तुमसे मेरी यही विनती है कि तुम पानी के अंदर रहते हुए ही मेरी बेटी को हर तरह की शक्तियों और जादू सीखा कर उसे इस संसार का सामना करना सिखाओ और याद रहे उसे कभी उसके पिता और उसके जन्म के बारे में पता न लगे। और वह कभी इस जादुई शीशे के बाहर ना जा पाए। उसका नाम रिमझिम रखना। 


ऐसा कहते हुए महारानी ने मंत्री सुमि को एक जादुई मोती दिया और बोली :- 

महारानी :- यह मोती तुम राजकुमारी के गले में दाल दो। जब तक यह मोती राजकुमारी के अंदर रहेगा तब तक वह किसी से प्रेम नहीं कर पायेगी और इस तरह से वो मेरी तरह प्रेम की असफलता से दुखी नहीं होंगी और मत्स्य लोक की सही प्रकार से देख-भाल कर पाएंगी। उसे मेरी तरह असफल प्रेम का दर्द नहीं सहना पड़ेगा। वो हमेशा न्याय-प्रिय रहेंगी। 


ऐसा कहते-कहते ही महारानी ने अपने प्राण त्याग दिए। प्रधानमंत्री सुमि ने वह मोती राजकुमारी रिमझिम के गले में डाल दिया और महारानी के मरते ही सारे लोक में दुःख का माहौल छा गया। सारे समुंद्री जीवो ने अपने शरीर से रंगो का त्याग कर दिया। सागर की लहरें पूरी तरह से शांत हो गयी। कई सालो तक न तो समुद्र में कोई लहर उठी ना ही कोई रंगीन मछलियाँ या कोई जीव दिखाई दिया। धीरे-धीरे 14 साल बीत गए। 

राजकुमारी रिमझिम को केवल मत्स्य लोक के सिवा फूल, साँप या समुंद्री जीवो के अलावा किसी और जीवित प्राणी के बारे में अब तक पता नहीं चला था। वह सिर्फ खाती, सोती और आराम करती। किन्तु जब भी वह मत्स्य लोक के चारो तरफ पानी का शीशा देखती तो उसे इस शीशे के बाहर निकलने का मन करता। किन्तु वह कुछ भी ना कर पाती। सभी उसे बहुत प्यार करते। सभी के प्यार के बाद भी वह किसी को भी बहुत ज़्यादा नहीं चाहती। उसकी माँ द्वारा दी गयी जादुई गोली के कारण वह बहुत ही मज़बूत हृदय की बन गयी थी। 

जलपरी - Jalpari


एक बार वह जब चुप-चाप पानी के जादुई शीशे के पीछे क्या होगा ये सोच रही थी कि आसमान में सुनहरे रंग का गोला तेज़ी से उसकी तरफ चला आ रहा है। रिमझिम डर के छुप गयी और देखने लगी कि वह क्या है। गोला समुन्द्र में गिरा कुछ देर बाद जब रिमझिम गोले के पास गयी तो उसने देखा कि वो एक विचित्र पक्षी है जो बुरी  
तरह से जला हुआ है। रिमझिम उसे घर ले आयी और उस पर अपने अधूरे सीखे जादुई मंत्रो आज़माने लगी। किन्तु कुछ भी नहीं हुआ। आखिरकार रिम-झिम ने उसे खाने का फैसला कर लिया। उसने अपने जादुई चाक़ू से जैसे ही उस पक्षी को काटने की कोशिश की वह पक्षी तुरंत ही एक राजकुमार में बदल गया और रिम-झिम बहुत ही डर गयी क्योकि इससे पहले रिम-झिम ने किसी इंसान को नहीं देखा था। 

अपने सामने इतनी खूबसूरत लड़की को देख कर राजकुमार उस पर मोहित हो गया और वह उससे विवाह करने के बारे में सोचने लगा। 

राजकुमार :- तुम कौन हो? और मुझे क्यों मारना चाहती हो ?

रिमझिम :- मैं मत्स्य राजकुमारी रिम-झिम हुँ। नहीं - नहीं मैं तुम्हे मारना नहीं चाहती थी। मैंने तुम्हे ज़िंदा करने की बड़ी कोशिश की थी। तुम एक विचित्र पक्षी के रूप में थे। मुझे पक्षी खाना बड़ा ही पसंद है इसलिए तुम जब ज़िंदा नहीं हुए तो मैंने सोचा की मैं तुम्हे खा लेती हुँ। और जब मैं तुम्हे काटने के लिए चाक़ू हाथ में लिए तुम्हारे पास आयी तो तुम तुरंत ही इस विचित्र रूप में बदल गए। 

राजकुमार :- मत्स्य राजकुमारी, क्या मैं सागर में हुँ? मुझे तो एक चुड़ैल ने काला हंस बना दिया था और जब उसने मुझे जलाने के लिए अपने हवन की अगनी में डाला तो ना जाने कैसे मैं सागर में गिर गया। तुमने मेरी रक्षा  की है। बोलो तुम क्या चाहती हो। 


रिमझिम को लगा सागर में बने पानी के शीशे से बाहर निकलने का यही सबसे अच्छा अवसर है। इसलिए वह बोली :-

रिमझिम :- राजकुमार मैं वर्षों से सागर में रहती हुँ। मैंने कभी बाहरी दुनिया को नहीं देखा। मैं मत्स्य लोक से बाहर की दुनिया को देखना चाहती हुँ। किन्तु हमारा राज्य सुरक्षा के लिए पूरी तरह से पानी के शीशे से घिरा हुआ है। क्या तुम मुझे इससे बाहर निकाल सकते हो? 


राजकुमार ने सोचा इस लड़की को यहाँ से ले जाने का और इससे विवाह करने का इससे अच्छा अवसर नहीं मिलेगा। 

राजकुमार :- यह कोई बड़ी बात नहीं है। मैं तुम्हे इस लोक से बाहर निकाल दूंगा। किन्तु उसके बदले में तुम्हे अपनी सारी शक्तियाँ यही छोड़ कर जानी होंगी। 



रिमझिम मत्स्य लोक से जाने के लिए इतनी उत्साहित थी कि उसने यह नहीं सोचा कि अगर वह अपनी शक्तियाँ छोड़ कर जाएगी तो वापिस आना उसके लिए पूरी तरह से ना-मुमकिन हो जायेगा और वह अपनी सारी शक्तिया छोड़ कर राजकुमार के साथ जाने को तैयार हो गयी। किन्तु उसने सोचा कि आखिर यह बाकी लोगो को कैसे पता चलेगा कि वह कहाँ चली गयी। सभी उसके लिए बहुत परेशान हो जायेंगे। इसलिए उसने अपना जादुई गोला अपने कपड़ों में छुपा लिया ताकि वह अपनी खबर अपने लोगो को देती रहे। और राजकुमार के साथ पानी के शीशे के उस पार चली गयी। उसने मत्स्य लोक में दे दी कि वह सुरक्षित है और जल्दी ही वापिस आ जाएगी। 


जलपरी - Jalpari

दूसरी तरफ रिमझिम राजकुमार के साथ उसके महल पहुँच गयी। रिमझिम के मन में राजकुमार के प्रति प्रेम की कोई भावना नहीं थी। क्योंकि उसकी माँ के द्वारा खिलायी गयी जादुई गोली अभी भी उसके शरीर में थी। इसलिए जब राजकुमार ने उसके आगे विवाह का प्रस्ताव रखा तो वह बड़ी ही हैरान हो गयी क्योंकि उसे प्रेम और विवाह दोनों का ही मतलब नहीं पता था। किन्तु जब राजकुमार ने इसे उसका मतलब बताया तो उसे राजकुमार पर बहुत क्रोध आया। वह क्रोधित हो गयी और वापिस अपने लोक जाने की ज़िद करने लगी। राजकुमार ने उससे माफ़ी मांगी और उसे सारा संसार दिखाने का वचन दिया। 

रिमझिम राजकुमार के साथ देश-विदेश घूमने लगी। तरह-तरह के रंग-बिरंगे पशु-पक्षी, इमारतें, वस्त्र, खाने-पीने की चीज़े, रथ, हथियार आदि देख कर वह बहुत ही खुश हो गयी। पर सब कुछ देखने के बाद उसे अपने मत्स्य लोक की याद आने लगी। किन्तु राजकुमार रिमझिम से बहुत प्यार करता था। जब उसे पता चला की रिमझिम उसे छोड़ कर वापिस अपने मत्स्य लोक जाना चाहती है तो उसकी तबियत बहुत खराब हो गयी। उसने रिमझिम को आखरी बार अपने पास बुलाया। 

राजकुमार :- राजकुमारी रिमझिम, अगर तुम मुझे छोड़ कर जाना चाहती हो तो तुम जाओ। पर मैं तुमसे बहुत प्यार करता हुँ और मैं चाहता हुँ कि आखरी बार तुम मेरे साथ बैठ कर भोजन करो। 

राजकुमार की बात सुन कर रिमझिम बहुत ही हैरान हो गयी क्योकि उसे यह पता ही नहीं था कि प्रेम होता क्या है। पर उसने राजकुमार के साथ खाना खाने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। अचानक खाना खाते-खाते रिमझिम को ज़ोर से खासी आ गयी और उसके गले में अटकी उसकी माँ के द्वारा दी गयी जादुई गोली निकल कर दूर गिर गयी और ओंझल हो गयी। गोली के गिरते ही रिमझिम के सोचने का तरीका अब पूरी तरह से बदल गया। अचानक उसे राजकुमार बहुत ही अच्छा लगने लगा और उसे ऐसा लगने लगा कि अगर वह उसे छोड़ कर अपने लोक वापिस गयी तो वह उसके बिना जी नहीं पायेगी। उसने राजकुमार से कहा :-

रिमझिम :- राजकुमार, मुझे पता नहीं की प्रेम क्या होता है किन्तु ना-जाने क्यों मुझे तुम्हे छोड़कर जाने का अब मन नहीं कर रहा है। मैं हमेशा तुम्हारे साथ ही रहना चाहती हुँ और अगर इसके लिए विवाह करना ज़रूरी है तो मैं तुमसे विवाह करना चाहती हुँ। 


जादुई गोले के निकलते ही रिमझिम को राजकुमार से प्यार हो गया था। राजकुमार के जीवन और राज्य में खुशिया और प्रसन्नता छा गयी। रिझिम का विवाह धूम-धाम से राजकुमार के साथ करवा दिया गया। इस विवाह में मत्स्य लोक के भी सभी लोगो को निमंत्रण दिया गया। इतना ही नहीं अपनी बेटी को सुरक्षित देख कर स्वर्गवासी मत्स्य लोक की महारानी भी स्वर्गलोक से अपनी बेटी को आशीर्वाद देने पृथ्वी लोक पहुंची और पृथ्वी लोक और मत्स्य लोक की दोस्ती हमेशा के लिए अमर हो गयी।

यह भी पढ़िए :- जादुई चक्की - Jadui Chakki


   

हमें कमेंट करके बताये की आपको यह नन्ही जल परी की कहानी कैसी लगी। हिंदी कहानिया 4 किड्स आपके लिए ऐसी ही अच्छी अच्छी कहानियाँ लाता रहेगा।   

धन्यवाद। 

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.