जादुई शंख - Jadui Shankh Ki Kahani

जादुई शंख की कहानी  - Jadui Shankh Ki Kahani

जादुई शंख - Jadui Shankh Ki Kahani


यह एक जादुई शंख की कहानी है जो रामू को एक सीख़ देता है जिससे उसका जीवन सुधर जाये। आइये देखते है कि शंख की वो सीख़ क्या थी। 


एक गांव में रामू नाम का एक लड़का रहता था। रामू बड़ा ही आलसी था। उसे काम करना बिलकुल पसंद नहीं था। रामू अपनी माँ के साथ रहता था। उसका यह आलस देख कर माँ उसे हमेशा डाटती रहती। 

माँ :- बेशरम, कब तक घर में बैठेगा? कुछ काम कर, जब देखो सोता रहता है। निकम्मा। 

रामू :- सारा समय क्यों मुझ पे चिल्लाती रहती हो माँ ? अभी मेरी उम्र ही क्या है। 


रामू की माँ रामू पर गुस्सा हो जाती है। 

रामू :- ठीक है। ठीक है माँ। अब गुस्सा मत करो। अब मैं जाता हुँ और काम ढूंढ कर ही वापिस आऊंगा और तब तक खाना भी नहीं खाऊंगा लेकिन दोपहर का खाना बना के रखना। 


रामू ये बोल कर हस्ते-हस्ते घर से चला जाता है। 

विशाल :- अरे आज सुबह-सुबह कहाँ जा रहे हो रामू? क्या इरादा क्या है ?

रामू :- जा रहा हुँ मुँह काला करवाने। तुम भी चलोगे? 


ये सुन कर विशाल गुस्से में आ कर वहाँ से निकल जाता है। 

रामू :- हुँह! आया बड़ा पूछ-ताछ करने। 


रामू गांव से बाहर चलने लगता है कुछ देर चलने के बाद रामू को एक मंदिर दिखाई देता है और वो रुक जाता है। 

रामू :- चलो दोपहर तक यह आराम करता हुँ फिर घर जा कर खाना खाऊंगा। माँ की बक-बक से छुटकारा भी और ज़रा आराम भी 


रामु मंदिर में सो जाता है। 

माँ :- मुझसे झूठ बोल कर यहाँ सो रहा है। अब तू गया काम से। 


और माँ उसे ज़ोर से एक डंडा मारती है और वो झट से उठ गया। 

रामू :- मत मारो माँ। मत मारो। मैं जाता हुँ काम पे। अरे! ये तो सपना था। लगता है मुझे कोई काम ढूंढ़ना ही होगा नहीं तो माँ सपने में आ कर भी मारेगी। लेकिन मुझे ऐसा काम ढूंढ़ना होगा जिसमे ज़्यादा मेहनत ना हो 

शंख :- मैं कर दूंगा तुम्हारे सारे काम। तुम करना सिर्फ आराम ही आराम 

रामू :- अरे कौन बोला भाई ? किसकी आवाज़ है ?

शंख :- हुनर मेरा लाजवाब है, ये मेरी आवाज़ है। 

जादुई शंख - Jadui Shankh Ki Kahani


रामू का ध्यान उस बोलने वाले शंख पर गया और रामू हैरान हो गया।  

शंख :- क्या तुम एक जादुई शंख हो ?

शंख :- हां। मैं एक जादुई शंख हुँ। मैं तुम्हे वो सब दे दूंगा जो तुम चाहते हो। 

रामू :- क्या तुम मुझे इतने पैसे दे सकते हो जिससे मुझे कभी कोई काम करने की ज़रूरत न पड़े। 

शंख :- हां ज़रूर। लेकिन उसके बदले में तुम्हे मेरा एक काम करना होगा। क्या तुम तैयार हो?

रामू :- कोनसा काम? बोलो। 

शंख :- तुम्हे मुझे एक बोरी चावल के निचे दबा के रखना होगा। अगर तुम यह काम कर सकते हो तो मैं तुम्हे बहुत सारा पैसा दूंगा। अगर नहीं कर पाए तो एक सीख मिलेगी। 

रामू :- हँ! ये तो बड़ा आसान काम है। 


जादुई शंख की बात सुन कर रामु ख़ुशी ख़ुशी घर आता है और चावल की एक बोरी उठा लेता है। माँ उससे इसके बारे में पूछती है मगर रामू अपनी ही धुन में है। गांव के लोग भी रामू की ख़ुशी देख कर हैरान है। रामू चावल की बोरी ले कर मंदिर आता है और थोड़े चावल बिछा कर जादुई शंख को उसके ऊपर रखता है और बाकी बोरी के चावल शंख के ऊपर डालने लगता है। शंख पूरी तरह से ढक जाता है। रामू खुश हो जाता है। तभी  अचानक चावल निचे से खिसकने लगते है और शंख ऊपर आ जाता है।  

रामू :- ये जादुई शंख ऊपर कैसे आ गया?

शंख :- करो, और एक बार कोशिश करो। 


रामू जादुई शंख को फिरसे एक बार ढकता है लेकिन शंख फिर से ऊपर आ जाता है। रामू बार-बार कोशिश करता है लेकिन शंख ऊपर ही आता रहता है। रामू पसीने से लथ-पथ हो जाता है और थक जाता है। गांव के लोग रामू की हालत देख कर उस पर हसने लगते है। 

एक आदमी :- अरे रामू, तुम बूढ़े हो जाओगे लेकिन इस शंख को चावल के नीचे नहीं दबा पाओगे। 

दूसरा आदमी :- शंख कभी चावल के नीचे नहीं दबता रामू। 


गांव वाले रामू पर हस्ते है और वहा से निकल जाते है। रामू हताश हो कर वही बैठ जाता है 

रामू :- हँ! इतनी मेहनत करके भी मुझे कुछ नहीं मिला जादुई शंख । 

शंख :- ऐसे कैसे? एक सीख़ तो ज़रूर मिली ना। 

रामू :- कोनसी सीख़ जादुई शंख

शंख :- बिना मेहनत के दुनिया में कुछ नहीं मिलता। 


कहानी की सीख़ :- बिना मेहनत हमे कुछ नहीं मिलता और अगर मिल भी जाता है तो वह सिर्फ कुछ देर ही हमारे पास रहता है। उसके बाद हमे उसकी दुगनी कीमत चुकानी पड़ती है।

हमे कमेंट करके बताये की क्या आपको बिना म्हणत के कभी कुछ मिला है? और अगर मिला है तो क्या वो लम्बे समय तक आपके साथ रहा है? हमे यह भी बताइयेगा की आपको यह जादुई शंख की जादुई कहानी कैसी लगी। हिंदी कहानिया 4 किड्स आपके लिए ऐसी ही अच्छी अच्छी कहानियाँ लाता रहेगा।  

धन्यवाद। 

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