जादुई चेहरा - Jadui Chehra

जादुई चेहरा 


यह एक जादुई चेहरा की कहानी है। एक जादुई तालाब व्यक्ति को उसके मन के अनुसार चेहरा देता है। आइये देखते है कि इस कहानी में किसे कैसा चेहरा मिलेगा। 

जादुई चेहरा - Jadui Chehra


एक गांव में धनीराम नाम का सेठ रहता था। वह बहुत ही धनवान व्यक्ति था। उसकी दो-दो पत्नियाँ थी। पहली पत्नी का नाम था रमा और दूसरी पत्नी का नाम था मीना। छोटी पत्नी मीना दिखने में बहुत सुन्दर थी। उसके काले घने बाल थे, उसकी सुन्दर नीली आँखे थी पर बड़ी पत्नी रमा ज़्यादा आकर्षक नहीं थी इसलिए सेठ मीना से ज़्यादा प्यार करता था। 


रमा दिल की साफ़ और शालीन औरत थी। वो घर के सारे काम करती थी। वही मीना पुरे दिन शीशे के आगे बैठी रहती और सजती रहती। एक दिन सेठ ने अपनी छोटी पत्नी मीना को आवाज़ लगाते हुए कहा :-

सेठ :- मीना, ओ मीना। ज़रा यहाँ आना। 


परन्तु तब मीना अपने बाल सँवार रही थी तो उसने सेठ की आवाज़ सुन कर भी कोई जवाब नहीं दिया। जब मीना नहीं गयी तो रमा सेठ के पास गयी तो सेठ ने उसे देखते ही कहाँ :-

सेठ :- मैंने मीना को बुलाया है। तुम क्यू आयी हो यहाँ। 

रमा :- मीना अपने बाल सँवार रही थी तो मैं आ गयी। कोई काम है तो बताओ। 



तभी मीना वहाँ आ गयी और आते ही रमा पर चिल्लाने लगी। 

मीना :- मुझे आने में देर क्या लगी तुमने तो मेरी शिकायत ही करना शुरू कर दिया। 

रमा :- नहीं। नहीं। मैं तुम्हारी शिकायत नहीं कर रही थी। मैं तो बस 

मीना :- हां। हां। वो सब मुझे पता है। चापलूस कही की। हँ। 



उन दोनों में झगड़ा बढ़ते देख सेठ ने रमा से कहा :-

सेठ :- अरे रमा, तुम ही रहने दो। क्या छोटी-छोटी बात पर झगड़ा शुरू कर देती हो। जाओ मेरे लिए एक गिलास पानी ले कर आओ। 



जब मीना पानी लेने गयी तो सेठ ने मीणा से कहा :-

सेठ :- सुनो, व्यापार के लिए दूसरे शहर जा रहा हुँ। एक महीने बाद लौटूंगा पर यह बात रमा को मत बताना क्योंकि मैं चलते समय उसका मनहूस चेहरा भी नहीं देखना चाहता हुँ। 

मीना :- हां, ठीक है। लेकिन आप मेरे लिए शहर से नई साड़ियाँ और गहने भी ले कर आना। 



उन दोनों की बाते रमा ने चुपके से सुन ली थी और सेठ की ऐसी बाते सुन कर रमा को बहुत दुःख हुआ पर वो फिर भी भगवान से कहती है :-

रमा :- है भगवान, मुझे कुछ नहीं चाहिए बस मेरे पति की रक्षा करना। 



सेठ के जाने के बाद रमा के प्रति मीना का व्यवार और ज़्यादा बिगड़ गया था। वो हर छोटी-छोटी बात पर  चिल्लाने लगती। एक बार दोनों में कहा-सुनी हो गयी तो मीना ने रमा से कहा :-

मीना :- तुम कुरूप हो। तुम्हें कोई प्यार नहीं करता। तुम किसी भी काम के लायक नहीं हो। 



मीना की ऐसी बात सुन कर रमा बहुत ज़्यादा दुखी हो गयी और घर छोड़ कर जंगल में चली गयी। जंगल में जाने पर उसने एक पेड़ देखा, जिसके निचे कचरा पड़ा था। तो रमा ने कहा :-

रमा :- ओहो! इस पेड़ के निचे कितनी गंदगी है। मैं यहाँ सफाई कर देती हुँ। 



रमा ने जैसे ही सफाई की वो पेड़ बोलने लगा। 

पेड़ :- तुम एक नेक दिल इंसान हो। तुम्हारे सारे दिल इस कचरे की तरह साफ़ हो जायेंगे। 


इस पर रमा ने पेड़ को शुक्रिया कहा और आगे चली गयी। आगे चलने पर उसने केले का पेड़ देखा, जो केलो के भार से एक तरफ झुक गया था। 

रमा :- यह पेड़ तो झुक गया है। इसे सहारे की ज़रूरत है। 


उसके बाद रमा ने एक लकड़ी लगा कर झुके पेड़ को सहारा दिया तो वह पेड़ भी बोलने लगा। 

पेड़ :- जैसे तुमने मुझे भार की वजह से गिरने से बचाया है, वैसे ही तुम भी हमेशा दुखों के भार से बची रहोगी। 



रमा ने केले के पेड़ को भी शुक्रिया कहा और आगे चली गयी। आगे चलने पर उसे एक पेड़ दिखा, जो लगभग सूख चूका था। 

रमा :- अरे! इस पेड़ को तो पानी की ज़रूरत है नहीं तो यह सुख जायेगा। 

जादुई चेहरा - Jadui Chehra


और रमा पास के तालाब से पानी ला कर उस पेड़ को डालती रही तो वह सूखा पेड़ अचानक से हरा-भरा हो जाता है और बोलने लगता है।  

पेड़ :- जिस प्रकार तुमने मुझे वापिस से खूबसूरत बनाया है, वैसे ही तुम भी हमेशा खूबसूरत रहो। जाओ पास के तालाब में डुबकी लगा कर आओ। 



और रमा ने पेड़ के कहने पर तालाब में डुबकी लगाई। देखते-ही-देखते वह किसी परी के समान खूबसूरत हो गयी और चेहरा भी चमकने लगा। 

रमा :- अरे वाह! मैं तो बिलकुल ही बदल गयी। धन्यवाद तुमने मेरी सहायता की। 



और फिर रमा जल्दी से अपने घर गयी तो मीना उसे देख कर बिलकुल चौक ही गयी। 

मीना :- तुम तो बिलकुल ही बदल गयी हो। आखिर तुम इतनी खूबसूरत कैसे हो गयी। 



मीना के पूछने पर रमा ने उसे सारा वाक़्या सुनाया तो मीना ने कहा :-

मीना :- मैं भी वहाँ जाउंगी और तुमसे भी खूबसूरत जादुई चेहरा ले कर आउंगी। 



उसके बाद मीना रमा के बताये रास्ते पर जाती है तो उसे भी वही पेड़ दिखते है पर वो उनकी तरफ ध्यान नहीं देती तो एक पेड़ ने खुद मीना से कहा :- 

पेड़ :- मेरे आस-पास बहुत कचरा पड़ा है। तुम थोड़ा साफ़ करदो। 



तो इस पर मीना ने कहा :-

मीना :- मैं यहाँ कोई सफाई करने नहीं आयी हुँ। तुम बस मुझे उस तालाब का पता बता दो, जो जादुई चेहरा देता है। 



और इसी तरह मीना सभी पेड़ो को उनके कामो के लिए मना करती रही और तालाब का पता पूछती गयी और फिर वो अंत में तालाब तक पहुँच ही जाती है। वो झट से उसमे डूबकी लगाती है तो वह खूबसूरत होने की बजाय कुरूप हो जाती है। यह देख मीना चिल्लाने लगी और वो पेड़ से पूछने लगी :- 

मीना :- तुमने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? 

पेड़ :- यह तालाब वैसा ही चेहरा देता है जैसा तुम्हारा मन है। तुम एक बुरे और घमंडी मन की इंसान हो। तुमने हमेशा अपने रूप पर घमंड किया है और रमा के साथ बुरा बर्ताव किया है, इसलिए तुम्हे यह मिला क्योंकि तुम इसी की हक़दार हो। 



इसके बाद मीना अपने किये पर बहुत दुखी हुई। इसके बाद रमा सेठ के पास रहती और मीना अपने किये पर रोती रहती।  


 कहानी की सीख़ :- किसी के साथ बुरा करने से फल हमेशा बुरा ही होता है।

हमे बताइयेगा कि क्या आप भी मीना के जैसे किसी व्यक्ति को जानते है? और हमे यह भी बताएगा कि जादुई चेहरा हिंदी कहानी आपको कैसी लगी। हिंदी कहानी 4 किड्स आपके लिए ऐसी ही अच्छी-अच्छी कहानी लाता रहेगा।

धन्यवाद।  


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