Hindi Moral Stories

Hindi Moral Stories



Today we are writing Hindi Moral Stories. These Hindi Moral Stories are for everyone but more especially for kids. These Hindi Moral Stories may also helpful for all. Like:- Kids, Parents, Elders, and Teachers to teach Kids.


List of Hindi Moral Stories which we are writing is Here ⬇️


  • Kek Ka Inaam Hindi Moral Stories  
  • Kauva Aur Jugnu Hindi Moral Stories  
  • The fox and the Goat Hindi Moral Stories  
  • The Proud Eagle Hindi Moral Stories    

Kek Ka Inaam - केक का इनाम (Hindi Moral Stories)


Hindi Moral Stories
(Hindi Moral Stories)


एक बार की बात है। एक बहुत ही मेहनती मुर्गी थी। उसके दो छोटे-छोटे बच्चे थे, जैकी और जॉनी। एक दिन मुर्गी ने केक बनाने का फैसला किया।

मुर्गी:- पता है बच्चो, आज मैं तुम्हारे लिए केक बनाने वाली हुँ।

जैकी:- ये,

जॉनी:- मज़ा आ गया।

मुर्गी:- अब पहले मुझे जा कर सामान लाना होगा। दूध, आटा, चीनी, और अंडे। बहुत सारा सामान है।

जैकी:- ठीक है मम्मा। जल्दी आना।

जॉनी:- मैं भी चलता हुँ।

मुर्गी:- सच में? तुम बहुत अच्छे हो जॉनी।


मम्मा मुर्गी और जॉनी बाजार से सामान ले आते है।

मुर्गी:- ओह! कितना भारी है। बैग वहाँ रख दो जॉनी और अंडे फ्रिज में रख दो।

जैकी:- मम्मा, आप आ गए? केक बन कर तैयार हो गया?

मुर्गी:- नहीं बेटा जैकी। अब हमे इसे एक साथ घोलना होगा। मुझे इसके लिए काफी कुछ चाहिए।

जैकी:- अहः तो जल्दी करो ना मम्मा। अब इंतज़ार नहीं होता।

जॉनी:- मैं आपको एक-एक करके सामान पकड़ाता हु मम्मी। बताइये क्या चाहिए?


जॉनी मुर्गी मुम्मा की बहुत मदद करता है।

मुर्गी:- अब हम इसे अवन में रख देंगे और फिर ये तैयार।


थोड़ी ही देर बाद केक बन जाता है।

जॉनी:- बाहर निकालने में मैं मदद करता हुँ मम्मी।

मुर्गी:- नहीं जॉनी, शुक्रिया। ये मैं ही करूंगी। ये गरम है।

जैकी:- केक बन कर तैयार हो गया। अब खाते है।

मुर्गी:- अब मैं केक काटूंगी बच्चो।


मुर्गी मम्मा ने केक काटा और दोनों को दिया, लेकिन जैकी को छोटा टुकड़ा और जॉनी को बड़ा टुकड़ा।

मुर्गी:- ये लो बच्चों।

जैकी:- पर मम्मी, मुझे इतना छोटा टुकड़ा क्यों? जॉनी को तो आपने बड़ा टुकड़ा दिया है।

मुर्गी:-  हां, बेशक बेटा जैकी। जो लोग काम करते है इनाम भी उन्हें ही मिलता है।



इस हिंदी मोरल स्टोरीज़ की सीख़:-जो लोग काम करते है इनाम भी उन्हें ही मिलता है।

Moral of this Hindi Moral Stories:- Those who work also get the reward.





Kauva Aur Jugnu - कौवा और जुगनू
(Hindi Moral Stories)


Hindi Moral Stories
(Hindi Moral Stories)



एक समय की बात है। एक जंगल में एक जुगनू रहती थी। वो जंगल में खेलती-कूदती रहती थी लेकिन एक कौवे ने जुगनू को देखा। उसे खाने के लिए उसने अपना मुँह खोला। उसे निगलने के पहले जुगनू ने कहा:-

जुगनू:- दोस्त, मेरी एक बात सुनो। अगर तुम मेरी बात सुनोगे तो तुम्हारा भला होगा।

कौवा:- जो भी है जल्दी बताओ।

जुगनू:- अकेले मुझे खा कर तुम्हारी भूख नहीं मिटेगी। मैं ऐसी जगह दिखाउंगी जहाँ बहुत सारे जुगनू मिलेंगे। अगर अभी तुम मुझे खा जाओगे तो वो जगह कहाँ है तुम्हे पता नहीं चलेगी ना।


जुगनू की बातो से कौवा लालची होने लगा। उसने कहा:-

 कौवा:- ठीक है। जल्दी दिखाओ।


तब जुगनू कौवे को एक जगह ले गयी। वहाँ कुछ लोग आग सेक रहे थे। कुछ देर के बाद वो लोग चले गए। आग से निकलते हुए कण हवा में उड़ रहे थे। जुगनू ने उन कणों को दिखते हुए कहा:-

जुगनू:- वो देखो ये सभी मेरे जैसे ही है।


कौवे बिना सोचे ही मुँह खोल कर उन कणों को निगलने लगा। बस उसका मुँह पूरा जल गया। उसने सोचा:-

कौवा:- ये कैसे कीड़े है। मुँह ही जल गया। इन्हे हम खा नहीं सकते।


ऐसा सोच कर वो वहाँ से उड़ गया। इस प्रकार हमे अपनी सूझ-भूझ से मुश्किलों से बाहर निकलना चाहिए।



इस हिंदी मोरल स्टोरीज़ की सीख़:- शारीरिक बल से मानसिक बल बड़ा होता है। 

Moral of this Hindi Moral Stories:- Mental force is greater than Physical Force.





The Fox and the Goat - एक गीदड़ और बकरी (Hindi Moral Stories)


Hindi Moral Stories
(Hindi Moral Stories)


एक बार एक धूर्त गीदड़ जंगल में घूम रहा था। वो अपने ख्यालों में खोया हुआ था। अचानक वो एक कुए में गिर गया। वो काफी देर तक कुए से बाहर आने की कोशिश करता रहा पर वो बाहर नहीं आ पाया। धूर्त गीदड़ मौके का इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद एक बकरी अपनी प्यास बुझाने के लिए कुए के पास आयी। गीदड़ को कुए में छोड़ने के बाद बकरी ने सोचा कि गीदड़ ज़रूर अपनी प्यास बुझाने के लिए कुए में गया है। उसने गीदड़ से आग्रह करते हुए कहाँ:-

बकरी:- गीदड़ जी, क्या आप मुझे पीने के लिए थोड़ा पानी दे सकते है।

गीदड़:- मेरी बात मानो दोस्त, इस पानी के जैसा मीठा और स्वादिष्ट पानी मैंने आज तक नहीं पीया है अगर तुम्हे भी इसका आनंद लेना है तो नीचे आ कर इसका स्वाद लो।


प्यासी बकरी तुरंत अपनी प्यास बुझाने के लिए उस कुए में कूद जाती है। पल भर में गीदड़ बकरी की पीठ पर पैर रख के कुए से बाहर निकल जाता है। बेवकूफ बकरी को अपनी ना-समझी का एहसास होता है पर बहुत देर हो चुकी थी। वो मदद के लिए गीदड़ के सामने गिड़गिड़ाती है पर वो गीदड़ उससे बोलता है:-

गीदड़:- तुम इतनी बेवकूफ हो कि कूदने से पहले सोचा भी नहीं कि कैसे कुए से बाहर निकलोगी।


बकरी के बारे में बिना सोचे धूर्त गीदड़ वापिस जंगल की तरफ चल दिया।


इस हिंदी मोरल स्टोरीज़ की सीख़:- कुछ भी करने से पहले अच्छे से सोचना चाहिए। 

Moral of this Hindi Moral Stories:- Look before you Leap.






The Proud Eagle - घमंडी चील  (Hindi Moral Stories)


Hindi Moral Stories
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एक बार की बात है। एक बहुत ही घमंडी चील थी। वो पहाड़ के शिखर पर रहती थी। उसे बहुत घमंड था क्योंकि वो माउंट एवेरेस्ट के सबसे ऊचे सिरे पर रहती थी। दुनिया की सबसे ऊची चोटी।

चील के बच्चे:- माँ, क्या हम कभी यहाँ से नीचे उतरेंगे ?

चील:- हां, जब तुम बड़े हो जाओगे तब जाना पर एक बात याद रखना।

चील के बच्चे:- क्या माँ ?

चील:- मैं बहुत बार नीचे गयी हूँ और मुझे बस वहाँ हर तरफ गंदे जानवर और पक्षी दिखते है। उनकी हमारे रहन-सहन कोई बराबरी नहीं। तो हम उनसे काफी बड़े है। ये हमेशा याद रखना बच्चों।


एक दिन एक महान आदमी माउंट एवेरेस्ट पर तपस्या करने आया। वो बिलकुल चील के घोसले के पास बैठ गया।

चील:- ओ नहीं, कितना गन्दा आदमी है वो। हमे उससे सावधान रहना होगा।


हर रोज़ चील नीचे जंगल में जा कर अपने परिवार के लिए खाना ले कर आती थी। वो महान आदमी हर रोज़ चील को जाते हुए देखता। एक दिन उस महान आदमी ने चील को बुलाया।

आदमी:- ओ, ओ, चील। यहाँ आओ मेरे पास।

चील:- क्या मैं?

आदमी:- हां। मैं तुम्हे ही बुला रहा हूँ। यहाँ आओ।

चील:- अहः। तुम क्या चाहते हो?

आदमी:- मैं तुम्हे रोज़ देखता हूँ। तुम और मैं, सिर्फ हम दोनों ही इस पहाड़ के शिखर पर है। क्यों ना हम दोनों दोस्त बन जाये?


चील हसने लगी।

आदमी:- क्या मैंने कुछ गलत कह दिया?

चील:- मैं तुमसे दोस्ती नहीं कर सकती।

आदमी:- क्यों?

चील:- क्योंकि तुम गरीब हो और गंदे भी। खुद को देखा भी है तुमने कभी?

आदमी:- तो क्या तुम ऐसा सोचती हो?

चील:- वैसे मुझे जा कर अपने बच्चो के लिए खाना ले कर आना है। तुमसे बात करने का वक़्त नहीं है मेरे पास।


चील को आने में बहुत देर हो जाती है और उसके बच्चे भूख से तड़प रहे होते है तो वो महान आदमी उन्हें अपनी बेरीज दे देता है और वो बच्चे उन्हें खाने लगते है। तभी चील भी वहाँ खाना ले कर आ जाती है।

चील:- हे, ये क्या है? मैंने कहा था ना कि मुझे तुमसे दोस्ती नहीं करनी है।

आदमी:- इन बच्चो को भूख लगी थी तो मैंने इन्हे अपनी बेरीज दे दी।

चील:- इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी। ये बच्चे हमेशा अच्छा जीवन ही जीते है। तुम ये नहीं समझोगे।

आदमी:- पर सुनो चील, बेशक तुम खुद को सबसे बड़ी पक्षी समझती हो लेकिन फिर भी तुम्हे खाना लेने ज़मीन पर ही आना पड़ता है। तो फिर तुम सबसे बड़ी पक्षी कैसे हुई? किसी को घमंड नहीं करना चाहिए। याद रहे हम उसी के सहारे ज़िंदा है जो हमे धरती देती है। फिर चाहे अमीर हो या ग़रीब।

चील:- अहः। मैं, मैं समझ गयी। मुझे माफ़ कर दो।


इस हिंदी मोरल स्टोरीज़ की सीख़:- किसी को भी खुद पर घमंड नहीं करना चाहिए। 

Moral of this Hindi Moral Stories:- No one should boast of themselves. 


दोस्तों आपको हमारी हिंदी मोरल स्टोरीज कैसी लगी हमे कमेंट में ज़रूर बताइयेगा। इस कहानी को शेयर भी करना। 

धन्यवाद। 😊


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Also Read:- Bhoot Ki Kahani.

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