सिंडिरेल्ला - Cinderella

सिंडिरेल्ला - Cinderella 


यह कहानी सिंडिरेल्ला की है कैसे वो अपने साफ़ दिल के कारन राजकुमार की जीवनसाथी बनती है। आइये देखते है की यह सब कैसे हुआ। 


यह कहानी सिंडिरेल्ला(Cinderella) और उसकी गॉडफेरी की है। सिंडरेल्ला अपनी सौतेली माँ और बहनो के साथ रहती थी। जो बेचारी सिंडिरेल्ला को डाटते-फटकारते रहते थे। सिंडिरेल्ला बहुत सुन्दर थी इसलिए उसकी सौतेली माँ और बहनो को उससे जलन थी। सिंडिरेल्ला की सौतेली माँ ने अपनी बेटियों को रानी की तरह रखा था और सिंडिरेल्ला को नौकरानी की तरह 

सिंडिरेल्ला - Cinderella


सौतेली माँ :- सिंडिरेल्ला।सिंडिरेल्ला। ये क्या है? अब तक फ़र्श साफ़ नहीं हुआ?  तुम कामचोर और निकम्मी हो। अगर तुमने यह जल्दी साफ़ नहीं किया तो आज तुम्हे खाना नहीं मिलेगा। समझी??


एक दिन उनके घर एक राजदूत आया और बोला :-

राजदूत :- महाराज ने राजकुमार के जन्मदिवस के अवसर पर सभी को आमंत्रित किया है। ख़ास कर की युवतियों को। शाही बॉल में राजकुमार अपनी जीवनसाथी का चुनाव करेंगे इसलिए राज्य की हर युवती को ख़ास आमंत्रण है। 


राजदूत की खबर सुनकर दोनों सौतेली बहने ख़ुशी से कूदने लगी। सिंडिरेल्ला को भी राजकुमार के शाही बॉल में जाना था  सिंडिरेल्ला की सौतेली माँ ने सोचा 

सौतेली माँ :- अगर सिंडिरेल्ला शाही बॉल में गयी तो राजकुमार उसे ही पसंद करेंगे। मुझे उसे बॉल से दूर रखना होगा। नहीं,नहीं, मैं इसे काम में इतना उलझा दूंगी की ये अपने लिए ड्रेस बना ही नहीं पायेगी। 

सौतेली माँ :- सिंडिरेल्ला, ये लो रेशम। मेरी दोनों बेटियों के लिए अच्छे-अच्छे कपडे सील दो। 

सिंडिरेल्ला :- माँ, अगर कपडा बच गया तो क्या मैं अपने लिए भी एक ड्रेस बना सकती हुँ। 

सौतेली माँ :- अच्छा। तुम्हे भी ड्रेस चाहिए? ठीक है। लेकिन मेरी एक शर्त है। तुम पहले मेरी बेटियों की ड्रेस सिलोगी और फिर घर का सारा काम करोगी और उसके बाद ही तुम अपने लिए ड्रेस बना सकती हो। 


बेचारी सिंडिरेल्ला ने अगले दो दिनों तक अपनी बहनो के लिए ड्रेस बनाया। अब सिर्फ एक ही दिन रह गया था बॉल को। लेकिन अब उसकी सौतेली माँ ने उसे सारे घर की साफ़-सफाई का काम दे दिया। अब बेचारी सिंडिरेल्ला सोच में पड़ गयी कि वो क्या करे।  

आखिर वो दिन आ ही गया जब सिंडिरेल्ला की सौतेली बहने उसी के बनाये कपडे पहने एक बग्गी में बैठ कर शाही बॉल के लिए निकल गए और बेचारी सिंडिरेल्ला उन्हें जाती देखती रही। 

सिंडिरेल्ला :- काश मैं भी शाही बॉल में जा पाती। 


और तभी उसकी गॉडफेरी उसके सामने आयी। 

गॉडफेरी :- सिंडिरेल्ला, क्या तुमने मुझे बुलाया? 

सिंडिरेल्ला :- आप कौन हो?

गॉडफेरी :- मैं तुम्हारी गॉडफ़ाइरी हुँ और यहाँ तुम्हारी इच्छा पूरी करने आयी हुँ। 

सिंडिरेल्ला :- क्या आप मुझे शाही बॉल में ले जा सकती है। 


गॉडफेरी ने हामी भरी और फिर अपनी जादुई छड़ी घुमाई जिससे सिंडिरेल्ला के फ़टे हुए कपडे चम-चमाती नई ड्रेस में बदल गए। 

सिंडिरेल्ला :- कितनी सुन्दर ड्रेस है ये। 


सिंडिरेल्ला ड्रेस पहन के घूम ही रही थी कि गॉडफेरी ने फिर से छड़ी घुमाई और पास ही पड़े कद्दू से बग्गी बना ली और फिर तीन चूहों को घोड़ो और चालक में बदल दिया और आखिर में गॉडफेरी ने सिंडिरेल्ला के गंदे-फ़टे जूतों को सुन्दर चमकीले जूतों में बदल दिया। 

गॉडफेरी :- अब तुम शाही बॉल में जाने को तैयार हो। लेकिन याद रहे तुम्हे बारा (12) बजे से पहले घर लौट आना होगा। वरना मेरा पूरा जादू उलट जायेगा और तुम फिर से अपनी असली हालत में आ जाओगी। 

सिंडिरेल्ला :- मैं याद रखूंणगी गॉडफेरी। थैंक यू सो मच। 


अब सिंडिरेल्ला ख़ुशी-ख़ुशी बग्गी में बैठ कर निकल गयी। वो राजमहल पहुंची और सभी लोग उसे ही देखते रह गए। यहाँ तक की उसकी सौतेली माँ और बहनो ने भी उसे पहचाना नहीं। राजकुमार ने सिंडिरेल्ला को डांस के लिए पूछा और उसने हामी भर दी। फिर काफी देर तक दोनों डांस करते रहे। अचानक सिंडिरेल्ला की नज़र घड़ी पर पड़ी। 

सिंडिरेल्ला :- अरे नहीं! बारा (12) बजने ही वाले है। 


और सिंडिरेल्ला वहाँ से दौड़ पड़ी। 

राजकुमार :- रुको। अपना नाम तो बताओ। 


राजकुमार ने सिंडिरेल्ला का पीछा किया। लेकिन वो वहाँ से चली गयी पर राजकुमार को सिंडिरेल्ला का एक जूता मिल गया। अगले दिन राजकुमार उस जूते के संग नगर में घूमने लगे। उन्होंने वो जूता हर लड़की को पहना कर देखा लेकिन किसी को वो फिट नहीं आया। आखिरकार वो सिंडिरेल्ला के घर पहुंचे और वहाँ उसने वो जूता सिंडिरेल्ला की बहनो को पहनाया। उनको भी वो जूता नहीं आया। फिर राजकुमार की नज़र कोने में खड़ी सिंडिरेल्ला पर पड़ी। 

राजकुमार :- क्या आप ये जूता पहन कर नहीं दिखाएंगी?

सौतेली माँ :- अरे नहीं! ये तो उस बॉल में नहीं आयी थी। वैसे भी यह एक नौकरानी है। 


राजकुमार के आग्रह पर सिंडिरेल्ला ने वो जूता पहना और उसे वो पूरी तरह से फिट आया। यह देख राजकुमार ने सिंडिरेल्ला को शादी करने के लिए पूछ लिया और फिर सिंडिरेल्ला और राजकुमार की शादी हो गयी और वो हमेशा खुशी- ख़ुशी रहने लगे। 


कहानी की सीख़ :- जो भाग्य में लिखा है वो हमसे कोई नहीं छीन सकता है। 


हमें कमेंट करके बताये की आपको सिंडिरेल्ला की स्टोरी कैसी लगी। हिंदी कहानिया 4 किड्स आपके लिए ऐसी ही अच्छी अच्छी कहानियाँ लाता रहेगा

धन्यवाद

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