Bhoot Ki Kahani

Bhoot Ki Kahani



Today we are writing a story on a Ghost of Haveli. Bhoot Ki Kahani. Many people like to read Bhoot Ki Kahani. Even I like to read Bhoot Ki Kahani. They are very interesting. I hope you too like it. 


Here we are starting our Bhoot Ki Kahani. ⬇️


Bhoot Ki Kahani
(Bhoot Ki Kahani)


आज की भूत की कहानी वास्तव में बहुत भयानक है। यह कहानी प्यारेपुर में बसी एक बहुत ही पुरानी हवेली की है। जो आज भी सुनसान पड़ी हुई है। इस हवेली में जो भी गया या जिसने भी वहा रात गुज़ारी वो कभी भी ज़िंदा लौट कर वापिस नहीं आया है। यहाँ तक की लोगो का ऐसा मानना है कि इस हवेली में प्रेतों का वास है। रात होते ही यहाँ पर मानो भूत-प्रेतों का साया मंडराने लग जाता है। यहाँ से नज़दीक कुछ डेढ़-सो मीटर की दुरी पर एक सड़क जाती है। यदि रात को वहाँ से कोई भी निकलता है तो कभी किसी को किसी के रोने की आवाज़े आती है या फिर किसी के कराहने की आवाज़े साफ़ सुनाई देती है। सुना है कि यहाँ पर मुग़ल-काल के बाद उनके पीढ़ी-दर-पीढ़ी से कोई-ना-कोई रहता ही चला आ रहा था। जिनका परिवार बहुत ही बड़ा था। 

एक समय की बात है। कुछ लोगो ने मिल कर उनके सारे परिवार की हत्या कर डाली थी। अकाल हत्या के चलते उस पुरे परिवार की आत्मा आज भी उस हवेली में भटकती रहती है। इस बात की पुष्टि तब हुई, जब एक इंसान उस हवेली से ज़िंदा वापिस लौट कर आया और उसने ये सारी घटना अपनी आँखों देखि बताई कि उसके साथ वहाँ पर क्या-क्या हुआ था। जो आज हम आपको बताने जा रहे है। 



Haveli Ka Pret - हवेली का प्रेत 
(Bhoot Ki Kahani)


Bhoot Ki Kahani
(Bhoot Ki Kahani)


बात लगभग 20 से 25 साल पुरानी है। एक राम नाम का लड़का उस हवेली के सामने वाले रास्ते से अपने घर जा रहा था की अचानक से उसकी बाइक खराब हो जाती है और नज़दीक किसी का होना उसे उस हवेली की ओर ले जाता है। राम को उस हवेली के बारे में बिलकुल भी कुछ भी नहीं पता था, जिस कारण से वो उस हवेली में चला गया। कहते है जब मौत आती है या डर पैदा होता है, तो दिमाग भी काम करना बंद कर देता है। ऐसा डर का साया और खौफ़ शायद ही किसी ने देखा होगा। 

सब बातो से अनजान और बेखबर रात के लगभग 10 बजे होंगे, जब राम ने उस हवेली में कदम रखा। जैसे ही वो हवेली में गया तो उस हवेली का तापमान (Temperature) कुछ अलग सा लगा क्योंकि बाहर बहुत ही गर्मी थी, लेकिन हवेली का मौसम बहुत ही ठंडा लग रहा था, लेकिन राम ने सोचा कि हवेली बहुत ही बड़ी है इसलिए हो सकता है यहाँ का मौसम ठंडा लग रहा हो। अंदर धुप आने के रास्ते बहुत कम है इसलिए ऐसा होगा। 

लेकिन राम को क्या पता था कि वो वहाँ आ तो गया है लेकिन उसके साथ क्या-क्या होने वाला है। राम जैसे ही हवेली में घुसा तभी अचानक से हवेली का दरवाज़ा बहुत ही भयानक आवाज़ करते हुए बंद हो गया। दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ ऐसी थी कि इंसान के रोंगटे खड़े हो जाये। राम को लगा कि बहुत पुराना दरवाज़ा है इसलिए बंद हो गया होगा, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं था। उस दरवाज़े के बंद होने का कारण कुछ और ही था। 

Bhoot Ki Kahani
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जैसे-जैसे रात होती जा रही थी राम को ठंडक ज़्यादा लगती ही जा रही थी। क्योंकि हवेली एकदम से सुनसान थी, राम ने जैसे ही एक कमरे की और अपना कदम बढ़ाया, तभी उसे ऊपर कमरे से किसी के रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी। उसने सोचा शायद कोई है, ऊपर कोई है। उसे महसूस होने लगा तो वो ऊपर सीढ़ियों की तरफ चल दिया। जैसे ही राम ऊपर पहुँचा तो देखता है कि वहाँ तो कोई भी नहीं है, लेकिन अब भी रोने की आवाज़ उसे साफ़ सुनाई दे रही थी। 

अब तो उसके शरीर का खोलता हुआ खून भी बर्फ होने लगा। वो भीतर से जमना शुरू हो गया था। उसने दरवाज़ा खोला तो क्या देखता है कि एक कुर्सी रखी हुई है और अपने आप हिल रही है। कोई बैठा हुआ है, जो की साफ़ नज़र नहीं आ रहा है। उसे देखने के लिए जैसे ही राम आगे बढ़ा तो उसे कुर्सी पे कोई भी दिखाई नहीं दिया। वो अब डरने लगा था, तभी कोई चिल्लाया। वो भाग कर नीचे की और गया तो देखता है कि फर्श पर खून पड़ा है, लेकिन वो खून ताज़ा नहीं था, बल्कि बहुत सूखा हुआ लग रहा था। 


Bhoot Ki Kahani
(Bhoot Ki Kahani)


अब वो वहाँ पर रुकना नहीं चाहता था। वहाँ से भाग जाना चाहता था। राम दरवाज़े की ओर भागा और उसे खोलने की कोशिश करने लगा, लेकिन दरवाज़ा खुल ही नहीं रहा था। आवाज़े बढ़ने लगी थी। माहौल डरावना होने लगा था। कुर्सियां अपने आप हिल रही थी। हवेली में ऊपर टंगा झूमर अपने-आप हिल रहा था। माहौल ऐसा हो गया था कि कोई भी इंसान खड़े-खड़े हृदयगति रुकने (Heartattack) से मर सकता था। वो द्रिश्य बर्दाश्त कर पाना शायद ही किसी के बस की बात थी। ऐसा डरावना मंज़र कभी नहीं देखा था और ना ही कभी पढ़ा था। 

रोने और चिल्लाने की आवाज़ों से उसका सर फटा जा रहा था। ऐसी भयानक आवाज़े अपनी ज़िंदगी में उसने कभी कहीं नहीं सुनी थी। उसने सोचा क्यों ना मैं छत से बाहर जाऊ। उसका दिमाग अब काम करना बंद कर रहा था, लेकिन अब उसे हवेली में कुछ अजीब-ओ-गरीब छाया भी दिखाई देने लगी थी, जिनके हाथ-पैर तो दिख रहे थे, पर सर नहीं दिख रहा था। वो ऊपर की तरफ भागा लेकिन उचाई बहुत थी जिसके कारण वो कूद नहीं पा रहा था, लेकिन एक कहावत है ना कि मरता क्या ना करता। वो वहाँ से कूदने के लिए तैयार हो गया। तभी उसे दिखाई दिया कि उसके पीछे कई सारी आत्माये एक साथ बढ़ रही है। 

Bhoot Ki Kahani
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आवाज़ इतनी तेज़ हो रही थी कि उसके शरीर में झनझनाहट हो रही थी। सर लगभग फटने की कगार पर आ चूका था और उसने आव देखा ना ताव और आखिरकार वो कूद ही गया। जब राम नीचे गिरा तो उसे बहुत सारी चोटें आ गयी, लेकिन उस बुरी हालत में भी वो वहाँ पर रुका नहीं और बहते हुए खून के साथ वहाँ से भाग निकला। जैसे ही वो कुछ दूर पहुँचा उसे कुछ लोग मिले जिन्होंने उसे अस्पताल में भर्ती करवाया। करीब महीनो के इलाज के बाद उसे होश आया। वो कई दिनों तक बेहोश पड़ा रहा था। धीरे-धीरे जब वो ठीक हुआ तो उसने ये सारी बाते अपने दोस्तों को बताई और सब को बताया कि सब कुछ करना लेकिन उस हवेली में कभी मत जाना क्योंकि वहाँ पर भूतो का वास है। 

दोस्तों आपको हमारी भूत की कहानी कैसी लगी हमे कमेंट में ज़रूर बताइयेगा। इस कहानी को शेयर भी करना। 
धन्यवाद। 😊


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Thank You 😊



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