नटखट परी - Natkhat Pari


नटखट परी 


यह एक नटखटी परी की कहानी है जो अपने मज़े के लिए सबको परेशान किया करती थी। आइये देखते है फिर उसे किसने और कैसे सबक सिखाया की वह सुधर गयी और एक अच्छी परी बन गयी। 


एक जादुई देश में परियो की रानी रूही का एक बहुत ही आलिशान महल था। रूही बहुत ही नेक और दयालु रानी थी। वो अपने महल में रहने वाली सभी परियों का बहुत ही अच्छे से ध्यान रखती थी। सभी परिया हमेशा एक दूसरे की मदद करती थी और कभी भी किसी को परेशान नहीं करती थी, लेकिन उन्ही के बीच तृषा नाम की  एक बहुत ही शरारती और नटखट परी थी। वो हमेशा अपनी शरारतो से सभी परियो को बहुत ही परेशान किया करती थी। एक दिन बग़ीचे में दो परियां पौधों को पानी दे रही थी। ये देख तृषा ने सोचा "ये दोनों कितने अच्छे से काम कर रही है। चलो कुछ मज़े किये जाये। 

नटखट परी - Natkhat Pari


इसके बाद तृषा चुपके से दोनों परियों के पीछे जाती है और उन दोनों की चोटियाँ एक दूसरे से बाँध देती है। जैसे ही वो दोनों अलग-अलग दिशा में जाती है उन दोनों के बाल खींच जाते है और वो रोने लगती हैं। यह देख तृषा बहुत तेज़ हस्ती है। फिर वो दोनों परियां उसे डाटने लगती है।

पहली परी :-          तृषा, ये तुमने क्या किया? तुम्हारी शरारते दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। 

दूसरी परी :-          क्या तुम्हे बिलकुल भी समझ नहीं है कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं?



दोनों परियों की बाते नज़रअंदाज़ कर के तृषा वह से चली जाती है। कुछ देर बाद उसे एक परी खाना बनाते हुए नज़र आती है। परी को खाना बनाते देख तृषा को एक शरारत सूझती है। वो परी के पास जाती है और उससे पूछती है :- 

तृषा :-                   क्या मैं तुम्हारी खाना बनाने में मदद कर सकती हूँ?

परी :-                   अरे वाह तृषा! आज तो तुम सामने से मदद करने की बात कर रही हो, तो तुम सारे                               खाने में नमक डाल देना। 


यह कह कर वो परी पानी पीने चली गयी। जब तक वह पानी पी कर वापिस आती है इतनी देर में तृषा सारे खाने में बहुत सारा नमक मिला कर फुर्र हो जाती है। दूसरी परी सोचने लगी "तृषा तो बहुत जल्दी काम करके चली गयी। चलो अच्छा ही हुआ। अब तृषा को काम की समझ हो गयी है। वह अब बड़ी हो गयी है। शाम को सभी परिया खाना खाने बैठती है। खाने में नमक ज़्यादा होने की वजह से रूही उस परी पर गुस्सा करने लगती है। 


रूही :-                  यह सब क्या है? (रूही खांसने लगती है) खाने में इतना ज़्यादा नमक क्यों है?

परी :-                    रानी परी, जब मैं खाना बना रही थी तो वहा पर तृषा आयी थी और खाने में नमक                                   मिलाने का काम मैंने उसे ही दिया था। मैंने नहीं किया यह। 


परी की यह बात सुन कर सभी परियां तृषा की शिकायत रानी परी से करने लगती है। सभी की शिकायते सुन कर रूही को बहुत गुस्सा आता है। वो तृषा को सबक सीखने की योजना बनती है। वह मन ही मन सोचती है कि "तृषा की शरारते बहुत बढ़ती जा रही है। आज तो हम उसे सबक सीखा के ही रहेंगे। 



नटखट परी - Natkhat Pari


रूही एक बड़ा सा डब्बा बग़ीचे के बीच में रख देती है और वो सभी को आदेश देती है कि कोई भी उसे खोले न क्योंकि ये एक मुसीबत का डब्बा है। फिर रूही महल के अंदर चली जाती है। सारी परिया भी उसके पीछे-पीछे अंदर चली जाती है। लेकिन तृषा के मन में उस डब्बे को खोलने की इच्छा जाग जाती है। वह मन ही मन सोचती है कि इस डब्बे में ऐसा क्या है जो की रानी परी ने इसे खोलने से ही मना कर दिया। मैं इसे खोल कर देखती हूँ। अब तो इसे खोलना बनता ही है। 



इच्छुकता में तृषा उस डब्बे को खोल देती है। जैसे ही वो उस डब्बे को खोलती है उसके अंदर से कुछ छोटे भूत बाहर निकलते है। वो बाहर निकलते ही कभी तृषा के बाल खींचते तो कभी उसे धक्का मारते। 



तृषा :-                      अरे! अरे! यह क्या हो रहा है? कौन हो तुम? तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?                                   मुझे छोड़ दो। मुझे छोड़ दो। 


तृषा के लाख बार बोलने पर भी वो नहीं रुकते है। तभी वहा पर अचानक से रूही और बाकी सभी परिया आ जाती है। 


तृषा :-                       रानी परी, रानी परी, मुझे बचाओ। मुझे इस शैतानो से बचाओ। 

रूही :-                      शायद अब तुम्हे समझ आ गया होगा कि जब तुम बाकी सभी परियों के साथ                                         ऐसा ही व्यवहार करती हो तो उन्हें कैसा महसूस होता होगा। 

तृषा :-                        जी, जी, रानी परी। मुझे समझ आ गया है कि मैं बहुत गलत करती हूँ। अपने                                          इस व्यवहार के लिए मैं बहुत ज़्यादा शर्मिंदा हूँ। मुझे माफ़ कर दो। मुझे माफ़                                        कर दो। 




 तृषा के ऐसे बोलते ही रूही जादू करती है और सभी भूत डब्बे के अंदर चले जाते है और तृषा भी सभी परियों से अपनी गलती के लिए माफ़ी माँगती हैं। अब सभी एक साथ ख़ुशी से रहने लगते है। 



कहानी की सीख़ :-       हमें कभी भी अपने आनंद के लिए दुसरो के लिए परेशान नहीं करना चाहिए। 

हमें कमेंट करके बताइये कि क्या आप कभी भी अपने आनंद के लिए दुसरो को परेशान करोगे? और हमे ये भी बताये की आपको यह कहानी कैसी लगी। हिंदी कहानी 4 किड्स आपके लिए ऐसी ही अच्छी-अच्छी कहानिया लाता रहेगा। 

धन्यवाद 


2 Comments

Please do not enter any spam link in the comment box.

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.