ब्यूटी एंड द बीस्ट - Beauty And The Beast


ब्यूटी एंड  बीस्ट


यह कहानी ब्यूटी एंड द बीस्ट की है। इस कहानी में भलाई ने सुंदरता पर विजय प्राप्त की। बीस्ट की अच्छाई ने ब्यूटी को अपना बना लिया और फिर वो ख़ुशी-ख़ुशी साथ रहने लगे। 



बहुत समय पहले की बात है। एक देश में एक व्यापारी अपनी तीन सुन्दर बेटियों के साथ रहता था। हालांकि तीसरी वाली सबसे सुन्दर और बुद्धिमान थी बाकियो से, इसलिए सब उसे ब्यूटी बुलाते थे।दूसरी ओर उसकी बहने बहुत ही ईर्षालु थी। उन्हें अपने पिता का पैसा खर्चने में ज़्यादा दिलचस्पी थी। ब्यूटी एक खूबसूरत राजकुमार का सपना देखा करती थी। वो हमेशा सोचती थी कि वो एक राजकुमार से शादी करेगी और उसके साथ उसके महल में रहेगी। सब कुछ खुशियों से भरा था ब्यूटी के जीवन में, उसके सपनों की तरह। 


एक दिन उसकी तकदीर बदल गयी। एक भयंकर तूफ़ान के कारण, उसके पिता के सारे जहाज़ डूब गए और साथ ही उसका सारा पैसा भी। व्यापारी घर आ कर अपनी तीनो बेटियों को सारी बाते बताता है। 

पिता :-         सब खत्म हो गया बच्चों। अब हम अमीर नहीं रहे। 

ब्यूटी :-         चिंता मत करिये पिता जी, जल्दी ही सब ठीक हो जायेगा।                                       हम इससे निकलने का कोई न कोई रास्ता निकल ही लेंगे।                            आप मेरे लिए सब कुछ हो। मैं आपके साथ खुश हूँ। 



जल्द ही सारे नौकर चले गए, उस व्यापारी की गरीबी के कारण। ब्यूटी घर चला रही थीजबकि दूसरी दोनों बहने शिकायतें करती रेहती थी कि कैसे उन्हें गरीबी में जीना पड़ रहा है। ब्यूटी हमेशा भगवान से प्रार्थना करती रहती कि वो उसके पिता के चेहरे पर ख़ुशी वापिस लाये। एक दिन व्यापारी को एक ख़बर मिली कि उनमे से एक जहाज़ बंदरगाह में आ रहा है। व्यापारी ये ख़बर तीनों बेटियों को सुनाता है। 


ब्यूटी एंड द बीस्ट - Beauty And The Beast


व्यापारी :-       मेरे पास एक अच्छी खबर है। मेरे जहाज़ों में से एक बंदरगाह पर वापिस आ रहा है। अब हम                              ग़रीब नहीं रहेंगे। इसी वक़्त मुझे बंदरगाह की तरफ निकलना होगा। मुझे बताओ मैं क्या लाऊ                            सब के लिए। 

पहली बेटी :-   मुझे नई ड्रेसेस चाहिए। 

दूसरी बेटी :-   मुझे गहने चाहिए। 

पिता :-           और तुम्हारे लिए क्या लाऊ मेरी प्यारी बच्ची, बताओ मुझे। 

ब्यूटी :-           मैं चाहती हूँ की आप सलामती के साथ वापिस लौटे। 

पिता :-            बेशक़ मेरी लाड़ली, लेकिन तुम्हे मुझसे एक चीज़ तो मांगनी ही होगी जो कि मैं ले कर आऊ। 

ब्यूटी :-           अम! एक गुलाब। आप मेरे लिए बस वही ले आना। 

पिता :-            बेशक़! मैं ज़रूर ले कर आऊंगा। 



और इस एहसास के साथ व्यापारी बंदरगाह के लिए निकल गया। जैसे ही वो बंदरगाह पर पहुँचा तो उसने देखा की उसका जहाज़ पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया है और उसे पता चला की सारे नाविक बचे हुए माल को लूट कर भाग चुके है। टूटे दिल के साथ व्यापारी घर वापिस जाने के लिए निकल पड़ा। ख्वाबो में डूबा व्यापरी राह भटक गया और घने जंगल में खो गया। बर्फ ऐसे गिर रही थी कि जैसे सारा समुन्द्र का पानी बर्फ बन के गिर रहा हो। उसका घोडा उस घनी बर्फ में चल नहीं पा रहा था, तो उसने उसे एक पेड़ के नीचे विश्राम के लिए खड़ा किया। वही दूर उसने कुछ रोशनियाँ चमकती हुई देखी और वो उसकी ओर बढ़ा। वो एक बड़ा सा महल था और जैसे ही वो वहा बढ़ा, सोने से बना चम्-चमाता दरवाज़ा खुल गया। ये बड़ा अजीब दृश्य था कि संतरो के पेड़ों से घिरे हुए रास्ते पर कोई बर्फ नहीं गिरी थी। 





व्यापारी :-         कितनी खूबसूरत जगह है। मुझे इस महल में प्रवेश करना चाहिए और महल के राजा से मिलना                          चाहिए।     


( व्यापारी उस रास्ते पर चलते हुए एक बड़े हॉल में पहुँचा। व्यापारी वहा रुका और आस-पास देखा कि कोई अंदर से आये पर बहुत देर तक इंतज़ार करने पर भी कोई नहीं आया। )



व्यापारी :-         कोई है? क्या कोई है इस महल में? हेल्लो। 


( वही एक खाने की मेज़ थी जिस पर ताज़ा खाना सजा था। नाज़ुक केक और फलों के साथ। )

व्यापारी :-          मेरे ख्याल से मुझे खाना खा लेना चाहिए। बाद में मैं धन्यवाद कह दूंगा चाहे वो कोई भी हो। 


( बिना समय गवाए उसने खाना ख़त्म किया। पेट भर खाना खाने के बाद वो ऊपर गया। उसने पहला दरवाज़ा खोला और देखा एक अच्छा सा बिस्तर वहा था। )



व्यापारी :-          ओह! मेरे भगवान! लगता है कि आज भाग्य मेरे साथ है। 



और फिर व्यापारी की आँख खुली एक नए और सुहाने दिन में। उसने कपड़ो का एक न्य जोड़ा तैयार पाया। उसने खुद को तैयार किया और नीचे हॉल में गया और देखा कि मेज़ पर ब्रेकफास्ट तैयार था। ( दूध, ताज़ा रस, और ब्रेड। उसने पेट भर के खाया और उठा। 




व्यापारी :-          हेल्लो! क्या कोई है यहाँ? धन्यवाद आपकी मेहमान-नवाज़ी के लिए। आप बहुत दयालु है। मैं                              अब जा रहा हूँ। बाय!


जब वो बाहर आया तो जहाँ तक उसकी नज़र गयी वहा तक उसने गुलाब ही गुलाब देखे। 

व्यापारी :-         ओह! वो गुलाब। खेर मैं इन सब में से एक गुलाब ब्यूटी के लिए ले जाता हूँ।   


वो तुरंत बाग़ में गया और एक गुलाब तोड़ लिया। जैसे ही उसने गुलाब तोड़ा वहा एक गुर्राने की आवाज़ आयी। 
जैसे ही वो पीछे मुड़ा, वो एक लम्बे-चौड़े दरिंदे के सामने खड़ा था। जिसकी आँखों में जैसे खून उतर आया था। उसके दांत और पंजे चाक़ू की तरह नुकीले थे।  




दरिंदा :-             तुमसे किसने कहा मेरे गुलाब तोड़ने को? क्या ये काफी नहीं था की मैंने तुम्हे अपने महल में                               पनाह दी? क्या इसी तरह तुम अपना आभार प्रकट करते हो? तुम्हारी इस गुस्ताख़ी की सजा                                तुम्हे मिलनी ही चाहिए।

व्यापारी :-         नहीं, मुझे शमा कर दो। हे दयालु स्वामी! मैंने सोचा वो उदार स्वामी जिसने मुझे खाना और                                  पनाह दी वो भी मेरी ज़रूरत में, 
                         वो बुरा नही मानेगा अगर मैं एक ही गुलाब ले लु अपनी बेटी के लिए।  

दरिंदा :-             बेटी, अम! तो फिर तुम्हारे लिए मेरे पास एक प्रस्ताव है, जो तुम्हारी जान बचा सकता है।   

व्यापारी :-          वो क्या है मेरे स्वामी? मैं आपके लिए कुछ भी करने को तैयार हूँ।                                                                    मेरी तीन बेटिया अब तक मेरा इंतज़ार कर रही होंगी। 

दरिंदा :-            तीन बेटिया? ठीक है! अपनी एक बेटी को यहाँ ले आओ। मैं उसे यहाँ रखूंगा और बदले में तुम्हे                           आज़ादी दे दूंगा। मंज़ूर है?





व्यापारी :-        मैं वादा करता हूँ। मैं वादा करता हूँ। मुझे यकीन है कि उनमे से एक ज़रूर तुम्हारे पास आएगी। 



दरिंदा :-           ठीक है, फिर मैं तुम्हे मेरा सबसे तेज़ घोडा दूंगा और मैं तुम्हे एक महीना दूंगा यहाँ वापिस                                  अपनी बेटी के साथ आने के लिए। अगर वो आती भी है तो उसे अपनी मर्ज़ी से आना होगा और                             किसी भी शर्त पर मैं उसे नही लूंगा। अगर तुम एक महीने के अंदर नही आये तो मैं खुद तुम्हे                               ढूंढने आऊंगा। अब जाओ यहाँ से और अपनी बेटी के लिए एक गुलाब लेते जाओ। 




हालांकि शुरू में व्यापारी ने अपनी जान बचाने के लिए ये प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था पर उसे नहीं लगता था की उसकी कोई भी बेटी ऐसा करने के लिए मानेगी। बेचारा व्यापारी, जीवित से ज़्यादा मृत महसूस करते हुए वापिस गया। घोडा जल्दी से दौड़ा और जल्दी ही व्यापारी को उसके घर ले आया। उसकी बेटिया दौड़ कर उससे मिलने आयी।  

ब्यूटी एंड द बीस्ट - Beauty And The Beast


पहली बेटी :-    ओह पिता जी, मुझे मेरा तोहफा दीजिए।

दूसरी बेटी :-    और मेरा तोहफा कहाँ है पिता जी?

ब्यूटी :-             आप कैसे है पिता जी? आप बहुत थक गए होंगे। 

पिता :-             ये लो जो तुमने मुझसे लाने को कहा था पर तुम नहीं जानती की इसकी क्या कीमत चुकानी                                 पड़ी।






( व्यापारी ने उन्हें उस जहाज़ और दरिंदे के बारे में बताया। )

पहले बेटी :-       ये तुम्हारी गलती है। तुम्हे उनसे फुल लाने को क्यों कहा?

दूसरे बेटी :-       हां, अगर तुमने अक्लमंदी वाली चीज़ मांगी होती तो ये कभी न होता।
  
ब्यूटी :-               मैं सच-मुच इस दुर्भाग्य का कारण बनी हूँ। इसलिए मैं पिता जी के साथ वापिस जाउंगी।                                      उनका वादा निभाने के लिए। 

पिता :-              ओह ब्यूटी, मुझे इतना अफ़सोस हो रहा है कि मैं तुम्हारे ऊपर ये दुर्भाग्य लाया हूँ आज। 

ब्यूटी:-               जो मैंने किया है, सही यही होगा की उसका दुःख भी मैं झेलू। 


ब्यूटी अपने फैसले पर डटी रही और अपने पिता का हौसला बढ़ाया और दिलासा दिया। उसका पिता उसे घर वापिस जाने के लिए कहता है ताकि उसकी ज़िंदगी बर्बाद न हो लेकिन ब्यूटी नहीं मानती है। इस दौरान जब वो बाते कर रहे थे तो रात हो गयी और उन्हें हैरानी हुई कि पूरा जंगल रोशन हो उठा था। जैसे पूरी कायनात उनका स्वागत कर रही हो। ब्यूटी को यह सब बहुत अच्छा लगा। 


जल्दी ही वो संतरे वाले पेड़ों के रास्ते पर पहुँच गए और देखा कि किला बहुत ही सुन्दर रोशनियों से सजा था। जब वो उस बड़े हॉल में पहुँचे तो उन्होंने पाया कि बढ़िया आज जल रही है। मेज़ पर स्वादिष्ट खानों का अम्बार लगा है। वो बहुत भूखे थे इस लम्बे सफर के बाद तो दोनों खाना खाने लगे। उन्होंने अभी अपना खाना खत्म नहीं किया था कि अभी उन्हें उस दरिंदे के कदमों की आहट सुनाई दी। 



दरिंदा :-                गुड इवनिंग, ब्यूटी।    

ब्यूटी :-                 गुड इवनिंग, महाराज। 

 दरिंदा :-               तो क्या तुम अपनी मर्ज़ी से आयी हो?

ब्यूटी:-                  हां।
  
दरिंदा :-                क्या तुम यहाँ  ख़ुशी से रहोगी अपने पिता के चले जाने के बाद?

ब्यूटी :-                 हां। 

दरिंदा :-               व्यापारी, अपने घोड़े के पास वापिस जाओ जो सोने से भरे ट्रंकों से लदा हुआ है। जो                                           तुम्हारे और तुम्हारी बाकि बेटियों के लिए होगा। 

व्यापारी :-            अलविद ब्यूटी, मैं हर दिन तुम्हे याद करूँगा प्रिय। 

ब्यूटी :-                मैं भी आपको याद करूंगी पिता जी। 



( फिर घोडा वहा से भागा और जल्द ही दूर ओझल हो गया। ) 

दरिंदा :-                ऊपर जाओ! आराम करो, गुड नाईट। 

ब्यूटी :-                  गुड नाईट। 



ब्यूटी ऊपर गयी और उसने पहला दरवाज़ा खोला और एक खूबसूरती से सज़ा हुआ कमरा। वो बिस्तर पर लेट गयी और तुरंत ही सो गयी। जब वो सुबह उठी, उसने देखा कि उसका श्रृंगार मेज़ सजा है। उस हर संभव चीज़ के साथ जो उसे चाहिए। उसने उस बड़े हाल में अपना लंच पाया। लंच के बाद वो एक कोने में एक सोफे पे चुप-चाप बैठ गयी। वो खुद को आज़ाद करने के बारे में सोचती-सोचती फिर से सो गयी। 

अब शाम का समय था। उसने उस दरिंदे की आहट सुनी। 


दरिंदा :-                 गुड़ इवनिंग! ब्यूटी। 

ब्यूटी :-                   गुड़ इवनिंग। 

दरिंदा :-                  क्या तुम मुझसे प्यार करती हो? क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

ब्यूटी :-                   अम्म!

दरिंदा :-                  है या न कहो। बिना डरे। 

ब्यूटी :-                   ओह नहीं। 

दरिंदा :-                 खेर, कोई बात नहीं। गुड़ नाईट ब्यूटी।

ब्यूटी :-                    गुड़ नाईट। 



ब्यूटी को बहुत ख़ुशी हुई कि उसके इंकार ने दरिंदे को बढ़काया नहीं। हर शाम खाने के बाद वो दरिंदा ब्यूटी से मिलने आता और हमेशा गुड़ नाईट कहने से पहले उससे वहीं सवाल पूछता और जब ब्यूटी मना कर देती तो वो काफी उदास हो कर चला जाता। 


जैसे-जैसे समय गुज़रने लगा। ब्यूटी अब दरिंदे से नहीं डरती थी क्योंकि वो हमेशा उस पर दयालु था। महल में रहना ही ब्यूटी के लिए इतना आनंद-दायी था। वो अक्सर बाग़ में भी जाती थी। वहाँ बगीचे में फुआरे थे, नारंगी के पेड़ थे, मेहँदी के बूटे थे और पक्षी भी थे। यहाँ तक कि वो दरिंदा कभी-कभी ब्यूटी के लिए पियानो भी बजता था और उसके साथ लम्बी बात-चीत भी करता था। तो सब-कुछ लम्बे समय तक चलता रहा जब-तक की अंत में ब्यूटी अपने पिता और बहनो को देखने के लिए तरसने न लगी। उसे इतना उदास देख कर दरिंदे ने उससे पूछा :-

ब्यूटी एंड द बीस्ट - Beauty And The Beast

दरिंदा :-                 क्या बात है प्रिय? आज-कल तुम बहुत उदास रहती हो। 

ब्यूटी :-                    मैं अपने पिता जी को देखने के लिए तरस रही हूँ। आप मुझे एक हफ्ते के लिए वहाँ जाने                                     की इजाज़त दे दे। मैं वादा करती हूँ कि मैं आपके पास वापिस आउंगी। 

दरिंदा :-                  आह! ब्यूटी क्या ये इसलिए है कि तुम मुझे पसंद नहीं करती हो। 

ब्यूटी :-                    नहीं, ऐसा नहीं है। मैं आपसे नफरत नहीं करती हुँ। मुझे भी आपसे कुछ दिन दूर जाने का                                  अफ़सोस होगा। 

दरिंदा :-                   तूम जो चाहती हो उसे देने से मैं इंकार नहीं कर सकता हालांकि इसके लिए मेरी जान भी                                   जा सकती है। अगर तुम वक़्त पर वापिस नहीं आयी तो मुझे मरा हुआ पाओगी। 

ब्यूटी :-                    ओह! मैं आपके साथ ऐसा नहीं होने दूंगी। आप हमेशा दयालु रहे है। 

दरिंदा :-                   तुम्हे सफर के किसी रथ की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। ये अंगूठी पहनो और सो जाओ। किसी                                    बात से मत डरो। शान्ति से सो जाओ और तुम अपने पिता को देखोगी जब तुम्हारी आँख                                   खुलेगी। 

ब्यूटी :-                     ओह! सच-मूच। धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद। 

दरिंदा :-                   जब तुम्हारी वापिस आने की इच्छा हो तो तुम ये अंगूठी उतार देना और तुम खुद को इस                                    महल में पाओगी। गुड़ नाईट ब्यूटी। मैं तुम्हे बहुत याद करूंगा। 

ब्यूटी :-                     गुड़ नाईट, और आपकी उदारता के लिए धन्यवाद। 

दरिंदा :-                   अहह! बस अपना वादा याद रखना। 

ब्यूटी :-                     हां, हां, हां। 



जैसे दरिंदा गया ब्यूटी फ़ौरन सो गयी और अगली सुबह उसने खुद को अपने घर अपने ही बिस्तर पर पाया। उसके इस तरह अचानक प्रकट होने पर उसकी बहने हैरान थी। उसके पिता ने उसे गले लगाया और वो ख़ुशी से रोने लगा। 

पिता :-                     ओह! ब्यूटी। मैं तुम्हारे लिए कितना चिंतित था। मैंने तुम्हे बहुत याद किया मेरी बच्ची। 

ब्यूटी :-                      मैंने भी आपको बहुत याद किया पिता जी। 



ब्यूटी ने अपने पिता को दरिंदे की उदारता के बारे में बताया। बहुत सोच-विचार के बाद उसने कहा 


पिता :-                      तुम मुझे स्वयं बता रही हो कि वो दरिंदा तुमसे बहुत प्यार करता है और वो तुम्हारे प्यार                                      और आभार का हकदार है अपनी उदारता और नरम-दिली के लिए। मेरे ख्याल से तुम्हे                                      उसे फल देना चाहिए वो करके जो वो चाहता है। उसकी बदसूरती के बावजूद। 



एक सप्ताह गुज़र गया और ब्यूटी किले में वापिस लौटना पूरी तरह से भूल गयी, जब तक कि एक रात उसे सपना आया कि वो दरिंदा ज़मीन पे गिरा पड़ा मर रहा है। 

ब्यूटी :-                      ओह! मेरे भगवान। 


ब्यूटी उस सपने से इतना डर गयी थी कि उसी शाम उसने अपने पिता और बहनो को अलविदा कहा। जैसे ही वो बिस्तर पर लेती उसने अपनी अंगूठी उतार दी और तब वो तुरंत सो गयी। अगली सुबह वो दरिंदे के महल में उठी। वो उस जगह भागी जहाँ उसने दरिंदे को मरते हुए देखा था और वो दरिंदा अभी भी वही पड़ा था। 


ब्यूटी :-                      ओह! क्या ये सच-मूच मर गया है? ये मेरी गलती है कि मैं तुम्हे अकेला छोड़ के गयी। 


ब्यूटी ने जब दरिंदे को गौर से देखा तो उसने पाया कि वो अभी भी साँसे ले रहा था। जल्दी से जा कर वो पानी लेकर आयी और उसके मुँह पर छिड़का और उसे बहुत ख़ुशी हुई कि अब वो दरिंदा होश में आ चूका था। 

ब्यूटी :-                       ओह! प्रिय, तुमने तो मुझे डरा ही दिया था। मुझे नहीं पता था कि मैं तुमसे कितना प्यार                                        करती हुँ। मुझे बहुत डर लगा कि कही तुम्हे कुछ हो तो नहीं गया। 

दरिंदा :-                     क्या तुम सच-मूच ऐसे बदसूरत प्राणी से प्रेम कर सकती हो जैसा कि मैं हुँ । 

ब्यूटी :-                       हां। मैंने देखा है कि तुममे एक उदार और नरम दिल है और इससे ज़्यादा मुझे क्या                                            चाहिए जीवन में। 

दरिंदा :-                      ब्यूटी, क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

ब्यूटी :-                        हां, मैं करूंगी। 



जैसे ही ब्यूटी ने ये कहा वो दरिंदा आँखे चौंधियाने वाली रौशनी से ढक गया और फिर हवा में तैरने लगा और वापिस नीचे आया एक खूबसूरत राजकुमार के रूप में 


ब्यूटी :-                        ओह! मुझे यकीन नहीं होता। तुम तो मेरे सपनो के राजकुमार हो। मैंने हमेशा तुम्हारे ही                                     सपने देखे थे। 

राजकुमार :-                ओह! मेरी ब्यूटी। मेरी प्यारी ब्यूटी। धन्यवाद मुझे उस भयंकर श्राप से आज़ाद करने के                                       लिए। एक चुड़ैल जिसे मैंने लड़ाई में हराया था उसने मुझे एक श्राप दिया था। जब वो                                         मर रही थी तो उसने मुझे श्राप दिया कि कोई मुझसे प्रेम नहीं करेगा और उसने मुझे                                           इस भयंकर दरिंदे में बदल दिया पर तुमने अपने सच्चे प्रेम से इस श्राप को तोड़ दिया।  

ब्यूटी :-                        ओह! कहीं मैं कोई सपना तो नहीं देख रही। क्या ये सच है?




( राजकुमार ने उसे धीरे से चुटकी काटी। )

ब्यूटी :-                        आउच! ये सपना नहीं है। तुम मेरे असली राजकुमार हो। मेरे सच्चे प्रेम। 

राजकुमार :-                 अब हमे और इंतज़ार नहीं करना चाहिए। चलो तुम्हारे घर चलते है और तुम्हारे परिवार                                      को हमारी शादी के लिए तैयार करते है 



और उसने ऐसा ही किया। अगले ही दिन विवाह सम्पंन हुआ बहुत धूम-धाम से। अंत में भलाई ने सुंदरता पर विजय प्राप्त की। सुंदरता केवल सुन्दर चेहरा पाना ही नहीं होता, ये है प्यारा मन, प्यारा हृदय और सबसे महत्वपूर्ण एक खूबसूरत आत्मा का होना। इस तरह ब्यूटी एंड बीस्ट हमेशा के लिए ख़ुशी-ख़ुशी साथ रहने लगे। 

कहानी की सीख :-  खूबसूरत चेहरा होना ही काफी नहीं होता, खूबसूरत दिल का होना सबसे                                     महत्वपूर्ण होता है। चेहरे की सुंदरता समय के साथ ढल जाती है लेकिन दिल                                की सुंदरता कभी नहीं ढलती।  



हमें ये अवश्य बताये की आपको ये कहानी कैसी लगी। हिंदी कहानिया 4 किड्स आपके लिए ऐसी ही अच्छी अच्छी कहानियाँ लाता रहेगा।
 

धन्यवाद | 


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